सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Forest Fires and Excessive Rainfall Emerge as Challenges in Uttarakhand read All Updates in hindi

उत्तराखंड: प्रदेश में जंगल की आग और अतिवृष्टि बनी चुनौती, तीस हजार हेक्टेयर से अधिक वन संपदा हो चुकी प्रभावित

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 22 Apr 2026 11:41 AM IST
विज्ञापन
सार

उत्तराखंड में जंगल की आग और अतिवृष्टि चुनौती है। 16 साल में 18 हजार से अधिक वनाग्नि की हुई घटनाओं में वन संपदा प्रभावित हुई है।

Forest Fires and Excessive Rainfall Emerge as Challenges in Uttarakhand read All Updates in hindi
Uttarakhand Forest Fire (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

उत्तराखंड में जंगल की आग और औसत से अधिक बारिश एक बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञ इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को मानते हैं। सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी से जंगल शुष्क होकर सुलग उठते हैं।

Trending Videos

जुलाई और अगस्त में अधिक बारिश हो रही है, जिससे कम समय में तेज बारिश से भी नुकसान हो रहा है। प्रदेश में 36937 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है, जहां हर साल आग लगती है। प्रदेश में वर्ष 2010 से 2025 के बीच 18074 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में तीस हजार हेक्टेयर से अधिक वन संपदा प्रभावित हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन


वन विभाग के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिले वनाग्नि की दृष्टि से अधिक संवेदनशील हैं।मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक ने बताया कि वनाग्नि से पर्यावरण प्रभावित होता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ने से आग का खतरा भी बढ़ राह है। सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी से जंगल शुष्क होते हैं, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ा है। यह मौसम परिवर्तन जलवायु परिवर्तन से जुड़ा हुआ है।

वनाग्नि की घटनाएं

नवंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक 61 वनाग्नि की घटनाएं हुईं। इस दौरान नंदा देवी बायोस्फीयर के जंगलों में आग लगी थी। आग पहाड़ियों की चोटियों तक पहुंच गई थी, जिसे बड़ी मुश्किल से काबू किया गया। 15 फरवरी से 21 अप्रैल 2026 तक 144 जंगल की आग की घटनाओं में 85 हेक्टेयर जैव विविधता को नुकसान हुआ है।

औसत से अधिक बारिश और आपदाएं

राज्य में बारिश की प्रवृत्ति भी बदल रही है। जुलाई 2025 में औसत से कम बारिश 350.2 एमएम हुई, जो कि औसत बारिश 417.8 एमएम की तुलना में कम थी। जबकि 2022, 2023 और 2024 में यह अधिक रही। अगस्त 2024 और 2025 में भी औसत से अधिक बरसात दर्ज की गई। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत के अनुसार, कम समय में तेज बारिश से समस्या बढ़ी है। पिछले साल हर्षिल, धराली समेत कई स्थानों पर बड़ी आपदाएं आई थीं। साथ ही छेनागाड, ताल जामण, तमकनाला, थराली, चेपड़ों, मोपाटा, पौसारी, बैसानी, थाने, भुजियाघाट, गुदमी, स्यानाचट्टी समेत अन्य जगहों पर आपदा से नुकसान पहुंचा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed