Yoga Day: यहां भगवान विष्णु अनादिकाल से सिखा रहे संतुलित जीवन का मंत्र, पदमासन मुद्रा में हैं विराजमान
पंच बदरी में शामिल योग बदरी भगवान विष्णु की आध्यात्मिक अवस्थाओं का दर्शन कराता है। यहां भगवान विष्णु स्वयं ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं।
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम एक बार फिर योग और आध्यात्मिक साधना के प्राचीन केंद्र के रूप में श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है। भगवान बदरीनाथ स्वयं ध्यान मुद्रा में विराजमान होकर मानवता को योग, संयम और संतुलित जीवन का संदेश दे रहे हैं। वहीं बदरीनाथ धाम से करीब 15 किलोमीटर पहले पांडुकेश्वर स्थित योग बदरी मंदिर में भगवान विष्णु पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं, जो योग की सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि पंच बदरी में शामिल वृद्ध बदरी (अणीमठ), ध्यान बदरी (उर्गम), योग बदरी (पांडुकेश्वर), बदरीनाथ धाम और भविष्य बदरी (तपोवन क्षेत्र) भगवान विष्णु की विभिन्न आध्यात्मिक अवस्थाओं का दर्शन कराते हैं। विशेष रूप से योग बदरी और बदरीनाथ मंदिर में भगवान की योग एवं ध्यान मुद्रा यह दर्शाती है कि भारतीय संस्कृति में योग की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है।
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उनका कहना है कि श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों में भगवान कृष्ण ने योग के महत्व का वर्णन किया है। गीता में कहा गया है कि योगी वह नहीं जो अत्यधिक खाता, सोता या बोलता है, बल्कि वह है जो जीवन में संतुलन बनाए रखता है। समय पर भोजन, समय पर विश्राम और नियमित दिनचर्या ही योग का मूल आधार है। भगवान का यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था।
योग विशेषज्ञ हरि प्रसाद ममगाईं का मानना है कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चमोली जिले के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर योग केंद्र एवं योग स्थल विकसित किए जाने चाहिए।
इससे न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ धाम और पंच बदरी के मंदिर आज भी यह संदेश दे रहे हैं कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने वाली जीवन पद्धति है।