{"_id":"6a5be4d23e130bcf46088479","slug":"it-park-to-get-relief-from-waterlogging-dehradun-news-c-5-1-drn1088-1021583-2026-07-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: आईटी पार्क में मिलेगी जलभराव से मुक्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: आईटी पार्क में मिलेगी जलभराव से मुक्ति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी के आईटी पार्क क्षेत्र में मानसून सीजन के दौरान जलभराव और फ्लैश फ्लड (अचानक से आने वाली बाढ़) की समस्या से राहत मिलेगी। इसके स्थायी हल के लिए सिंचाई विभाग की ओर से कराए गए विस्तृत हाइड्रोलॉजिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी हो गई है। यहां पर एकीकृत बाढ़ शमन योजना (इंटीग्रेटेड फ्लड मिटिगेशन प्लान) तैयार की गई है। इसके तहत सहस्रधारा हेलीपैड के नीचे प्राकृतिक चेकडैम बनाए जाएंगे। इससे पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सकेगा।
कलेक्ट्रेट में शनिवार को रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की मौजूदगी में हुई बैठक में एनआईवीवी कंसलटेंसी सर्विसेज ने सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार आईटी पार्क क्षेत्र करीब 4.91 वर्ग किलोमीटर के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से प्रभावित होता है। पहाड़ों से तेज गति से आने वाला बारिश का पानी इस इलाके में इकट्ठा हो जाता है। तेजी से हुए शहरीकरण और निर्माण के कारण पानी प्राकृतिक रूप से जमीन में समावेश नहीं हो पाता, जिससे यहां अचानक बाढ़ आ जाती है। इससे यहां पर जलभराव की समस्या लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट में समस्या के समाधान के लिए कई वैज्ञानिक सुझाव दिए गए हैं। इनमें सहस्रधारा हेलीपैड के नीचे लगभग 1.2 किलोमीटर क्षेत्र में प्राकृतिक चेकडैम की श्रृंखला विकसित करने की योजना है। इससे बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव और उसकी गति को नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके अलावा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में जल संरक्षण के उपाय किए जाएंगे, जबकि नदियों और बरसाती नालों के किनारों को तकनीकी रूप से विकसित कर जल प्रवाह को सुचारु बनाया जाएगा। इससे न केवल बाढ़ का खतरा कम होगा बल्कि भूजल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञापन
डीपीआर स्वीकृत होते ही होगा निर्माण
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि तेज बारिश के दौरान सड़कों पर बहने वाले पानी से ट्रैफिक जाम, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि डीपीआर स्वीकृत होते ही सुरक्षा और बाढ़ शमन से जुड़े निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे जिससे आईटी पार्क क्षेत्र के हजारों लोगों को हर वर्ष होने वाली परेशानी से राहत मिल सकेगी।
विज्ञापन
कलेक्ट्रेट में शनिवार को रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की मौजूदगी में हुई बैठक में एनआईवीवी कंसलटेंसी सर्विसेज ने सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार आईटी पार्क क्षेत्र करीब 4.91 वर्ग किलोमीटर के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से प्रभावित होता है। पहाड़ों से तेज गति से आने वाला बारिश का पानी इस इलाके में इकट्ठा हो जाता है। तेजी से हुए शहरीकरण और निर्माण के कारण पानी प्राकृतिक रूप से जमीन में समावेश नहीं हो पाता, जिससे यहां अचानक बाढ़ आ जाती है। इससे यहां पर जलभराव की समस्या लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
रिपोर्ट में समस्या के समाधान के लिए कई वैज्ञानिक सुझाव दिए गए हैं। इनमें सहस्रधारा हेलीपैड के नीचे लगभग 1.2 किलोमीटर क्षेत्र में प्राकृतिक चेकडैम की श्रृंखला विकसित करने की योजना है। इससे बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव और उसकी गति को नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके अलावा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में जल संरक्षण के उपाय किए जाएंगे, जबकि नदियों और बरसाती नालों के किनारों को तकनीकी रूप से विकसित कर जल प्रवाह को सुचारु बनाया जाएगा। इससे न केवल बाढ़ का खतरा कम होगा बल्कि भूजल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञापन
डीपीआर स्वीकृत होते ही होगा निर्माण
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि तेज बारिश के दौरान सड़कों पर बहने वाले पानी से ट्रैफिक जाम, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि डीपीआर स्वीकृत होते ही सुरक्षा और बाढ़ शमन से जुड़े निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे जिससे आईटी पार्क क्षेत्र के हजारों लोगों को हर वर्ष होने वाली परेशानी से राहत मिल सकेगी।