कांवड़ यात्रा: बदला स्वरूप, यात्रियों की संख्या बढ़ी, पहले पैदल ही आते थे, अब डाक कांवड़ का बढ़ा प्रचलन
कांवड़ यात्रा का स्वरूप बदला है। आठ-दस वर्षों में में कांवड़ यात्रियों की संख्या में बढोत्तरी हुई है।
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सावन की शिवरात्रित के लिए देश के विभिन्न प्रदेशों से कांवड़ यात्री गंगाजल भरने के लिए गंगोत्री धाम और गोमुख पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों की माने तो पिछले आठ से दस वर्षों में कांवड़ यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले देश के विभिन्न प्रदेशों से आकर पैदल कांवड़ यात्री कांवड़ लेकर जाते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में डाक कांवड़ के बढ़ते प्रचलन के कारण आस्था के साथ हुड़दंग भी देखने को मिल रहा है।
आगामी 11 अगस्त को सावन की शिवरात्रि के लिए देश के विभिन्न प्रदेशों से कांवड़ यात्री गंगोत्री और गोमुख से गंगाजल भरकर ले जा रहे हैं। वहीं, अगस्त की शुरूआत से डाक कांवड़ भी शुरू हो जाएगी। गंगोत्री धाम के पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष व स्थानीय धमेंद्र राणा कहते हैं कि आज से आठ-दस वर्ष पूर्व तक खड़ी कांवड़ देखने को मिलती थी।
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विभिन्न प्रदेशों से लोग गंगोत्री और गोमुख पहुंचते थे। वहां से गंगाजल भरकर पैदल ही खड़ी कांवड़ लेकर जाते थे लेकिन अब खड़ी कांवड़ का स्वरूप बदल गया है। साथ ही पहले कांवड़ भंडारों का प्रचलन भी नहीं था लेकिन अब डाक कांवड़ के प्रचलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर भंडारों का आयोजन होता है।
इसके साथ ही डाक कांवड़ के दौरान डीजे सहित बाइक के साइलेंसर आदि की आवाज के साथ ही कांवड़ यात्रियों का अधिक हुड़दंग देखने को मिलता है। हर्षिल क्षेत्र में सेब के बगीचों को नुकसान पहुंचाने को लेकर पिछले कुछ वर्षों में विवाद की कई घटनाएं हुई है।