Uttarakhand: काशीपुर गैस पावर प्लांट मामला: यूपीसीएल की समीक्षा याचिका खारिज, 228 करोड़ की देनदारी बरकरार
काशीपुर स्थित गैस आधारित पावर प्लांट से जुड़े लंबे समय से चल रहे टैरिफ विवाद में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने यूपीसीएल को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने पूंजीगत लागत से जुड़े अपने पहले के आदेश में किसी बदलाव से इनकार करते हुए समीक्षा याचिका खारिज कर दी है। इससे बिजली खरीद से संबंधित वित्तीय दायित्वों को लेकर यूपीसीएल पर तय भुगतान व्यवस्था यथावत रहेगी।
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यूपीसीएल को काशीपुर स्थित गैस आधारित पावर प्लांट गामा इंफ्रा के मामले में राहत नहीं मिली। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूपीसीएल की समीक्षा याचिका खारिज कर दी। अब यूपीसीएल को 492 करोड़ पूंजीगत लागत के तहत टैरिफ पर आने वाले 228 करोड़ की बाकी रकम भी निर्धारित किस्तों में देनी होगी।
यह मामला काशीपुर स्थित 214 मेगावाट के गैस आधारित कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट के टैरिफ (बिजली दर) के पुनर्निर्धारण और अपेलट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (एप्टेल) के आदेश के क्रियान्वयन से जुड़ा है। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य तकनीकी पीके डिमरी, सदस्य विधि अनुराग शर्मा की पीठ ने यूपीसीएल की उस समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 17 अक्तूबर 2025 को पारित आदेश पर सवाल उठाए गए थे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यूपीसीएल को सुनवाई और अपनी बात रखने के पर्याप्त अवसर दिए गए थे, इसलिए प्राकृतिक न्याय के हनन का दावा निराधार है। एप्टेल के निर्देशों के अनुपालन में आयोग ने संयंत्र की कुल स्वीकृत पूंजी लागत को संशोधित कर 492.03 करोड़ रुपये कर दिया है, जो पहले 388.96 करोड़ रुपये थी। आयोग ने माना कि व्यय से जुड़े आंकड़े वैधानिक लेखा परीक्षकों से प्रमाणित हैं, जिन्हें नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
चार किस्त चुकाई, आठ बाकी
इस फैसले से यूपीसीएल को गामा इंफ्रा के 228 करोड़ चुकाने हैं। पूर्व में ही नियामक आयोग टैरिफ में इसकी व्यवस्था दे चुका है। इसकी चार किस्त यूपीसीएल दे चुका है। अब आठ किस्तों में और भुगतान करना है। नियामक आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान बिजली दरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
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ये है मामला
एमएस गामा इंफ्राप्रॉप ने अपने पावर प्लांट के टैरिफ निर्धारण को लेकर 2017 में एप्टेल में अपील की थी। एप्टेल ने 30 मई 2025 को अपने फैसले में प्लांट के हक में कई निर्देश दिए थे, जिसके अनुपालन में आयोग ने 17 अक्तूबर 2025 को आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ यूपीसीएल ने आयोग में समीक्षा याचिका दायर की थी, जिसे आयोग ने तमाम कानूनी पहलुओं और साक्ष्यों की जांच के बाद अब निस्तारित कर दिया है।