Uttarakhand: भारत-तिब्बत व्यापार की गवाह किलोंग मंडी अब पर्यटकों से गुलजार, खूबसूरत वादियों के हुए मुरीद
नीती गांव से करीब 35 किमी आगे मखमली बुग्यालों के बीच इस स्थान पर जाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है। अब पर्यटक इस खूबसूरत क्षेत्र में पहुंच लगे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत-तिब्बत व्यापार के दौरान सीमा पर स्थित किलोंग मंडी दोनों देशों के व्यापारियों के व्यापार की प्रमुख केंद्र थी। दशकों से वीरान पड़ी यह मंडी अब धीरे-धीरे पर्यटकों की नजर में आ रही है, पर्यटक सीमा दर्शन योजना के तहत यहां पहुंचने लगे हैं। स्थानीय लोग भी यहां पहुंचकर पूर्वजों की यादों को ताजा कर रहे हैं।
भारत-चीन सीमा पर एक ऐसा स्थान है जहां कभी भारत व तिब्बत के व्यापारी आते थे। यह स्थान व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था लेकिन 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार बंद हो गया और यह स्थान इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गया। नीती गांव से करीब 35 किमी आगे मखमली बुग्यालों के बीच इस स्थान पर जाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है। अब पर्यटक इस खूबसूरत क्षेत्र में पहुंच लगे हैं।
Badrinath Highway: भनेरपाणी में तीन घंटे बंद रही आवाजाही, जाम से तीर्थयात्री रहे परेशान; पानी तक नहीं मिला
स्थानीय लोग पहुंच रहे किलोंग मंडी
सीमांत क्षेत्र के लोगों का दल भी इस स्थान पर पहुंचकर पुरानी यादों को ताजा कर रहा है। हाल ही में किलोंग मंडी गए स्थानीय लोगों के दल में शामिल लक्ष्मण फरकिया ने बताया कि इस क्षेत्र में जाने के लिए नीती गांव से होकर गुजरना पड़ता है। यह क्षेत्र भारत-तिब्बत व्यापार का प्रमुख केंद्र था लेकिन युद्ध के बाद यह वीरान हो गया। अब सरकार की सीमा दर्शन योजना के तहत पूर्वजों की इस विरासत को देखने और उस समय की परिस्थितियों को समझने का मौका मिला है। यह स्थान बहुत ही खूबसूरज है। अब यहां तक सड़क भी बन चुकी है।
इस क्षेत्र में जाने के लिए अनुमति की जरूरत पड़ती है। यहां स्थानीय लोग तो जाते थे लेकिन इस साल से पर्यटक भी पहुंचने लग गए हैं।
- चंद्रशेखर वशिष्ठ, एसडीएम ज्योतिर्मठ।