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बिरही-निजमुला मार्ग पर हो रहा भूस्खलन: बिना बारिश के ही दरक रही ‘काली चट्टान’, हर पल बना है दुर्घटना का खतरा

Tue, 14 Jul 2026 07:04 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, पीपलकोटी (चमोली)
संवाद न्यूज एजेंसी, पीपलकोटी (चमोली) Published by: Alka Tyagi Updated Tue, 14 Jul 2026 07:04 PM IST
सार

बिरही-निजमुला (गौणा) मार्ग निजमुला घाटी के ग्राम पंचायत पाणा, ईराणी, झींझी, गौणा, भनाली, मोली, हडुंग, गाड़ी, सैंजी सहित 15 से अधिक गांवों के 15000 से अधिक लोगों की जीवनरेखा है। लेकिन यहां  ‘काली चट्टान’ परेशानी का सबब बनी हुई है।

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Landslide on Birhi-Nijmula route Black rock cracking even without rain constant risk of accidents.
बिरही-निजमुला (गौणा) मार्ग पर भूस्खलन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बिरही-निजमुला (गौणा) मार्ग पर परेशानी का सबब बनी ‘काली चट्टान’ एक बार फिर लोगों की चिंता का कारण बन गई है। यहां बिना बारिश के भी रुक-रुककर भूस्खलन हो रहा है जिससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बेहद जोखिमभरी बनी है। मंगलवार को भी यहां भूस्खलन हुआ। गनीमत रही उस दौरान किसी वाहन की आवाजाही नहीं हो रही थी। लोगों ने जिला प्रशासन से यहां स्थायी समाधान कराने की मांग की।

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यह मोटर मार्ग निजमुला घाटी के ग्राम पंचायत पाणा, ईराणी, झींझी, गौणा, भनाली, मोली, हडुंग, गाड़ी, सैंजी सहित 15 से अधिक गांवों के 15000 से अधिक लोगों की जीवनरेखा है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट, पूर्व प्रधान मोहन सिंह नेगी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य भरत सिंह राणा, सुरेंद्र गड़िया समेत अन्य ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2024 में इस स्थान पर पहली बार बड़े पैमाने पर भूस्खलन शुरू हुआ था। पिछले वर्ष यहां करीब एक सप्ताह तक रुक-रुककर मलबा गिरने से सड़क बंद रही थी।
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लोगों को करीब तीन किमी पैदल चलकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ा था। उन्होंने जिला प्रशासन से यहां स्थायी समाधान कराने की मांग की। वहीं लोनिवि के अधिशासी अभियंता तनुज कांबोज ने बताया कि काली चट्टान के उपचार का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बरसात के दौरान यहां मशीनों के साथ पर्याप्त मैनपावर की तैनाती की जाएगी ताकि मार्ग पर यातायात सुचारु बना रहे।

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