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एलयूसीसी घोटाला : सीबीआई ने दो और आरोपियों को मुंबई से किया गिरफ्तार
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लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) घोटाले में सीबीआई ने सोमवार को दो आरोपियों को मुंबई से गिरफ्तार किया है। किशन जैन और पंकज जैन उर्फ पंकज चौधरी नाम के इन आरोपियों को ठगी की रकम को बेनामी संपत्तियों में निवेश करने का आरोप है। इस मामले में मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी देश छोड़कर भाग चुके हैं। पकड़े गए आरोपियों को सीबीआई बी वारंट पर देहरादून लेकर आ रही है।
वर्ष 2023 में एलयूसीसी नाम की इस कंपनी ने प्रदेशभर में अपनी 35 शाखाएं खोली थीं। लोगों से उनकी बचत को आरडी और एफडी के माध्यम से जमा कराया और उन्हें बड़े रिटर्न का भरोसा दिलाया। कुछेक रकम लोगों को शुरुआत में वापस भी की गई लेकिन जून 2024 में एकाएक कंपनी के कई कार्यालय बंद होने लगे। लोगों ने अपने रिटर्न के बारे में जानकारी मांगी तो एजेंट भी कोई जवाब नहीं दे पाए। इस पर कोटद्वार कोतवाली में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद लगातार लोग सामने आए और पूरे प्रदेश मे कुल 18 प्राथमिकी दर्ज की गईं। प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी और कुल 10 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई।
इसके बाद एक याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए। नवंबर 2025 में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और आरोपियों की गिरफ्तारियां शुरू कीं। गत 12 और 13 मई को पांच आरोपियों ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव, सुशील गोखरू और राजेंद्र सिंह बिष्ट को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपी इस वक्त सुद्धोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
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अब सोमवार को सीबीआई ने किशन जैन और पंकज जैन को गिरफ्तार किया है। ये दोनों समीर अग्रवाल के खास लोग बताए जा रहे हैं। इनके माध्यम से समीर अग्रवाल ने ठगी की रकम को इधर-उधर कई बेनामी संपत्तियों में निवेश कराया है। बता दें कि कंपनी ने करीब एक लाख लोगों से 800 करोड़ रुपये ठगे हैं।
वर्ष 2023 में एलयूसीसी नाम की इस कंपनी ने प्रदेशभर में अपनी 35 शाखाएं खोली थीं। लोगों से उनकी बचत को आरडी और एफडी के माध्यम से जमा कराया और उन्हें बड़े रिटर्न का भरोसा दिलाया। कुछेक रकम लोगों को शुरुआत में वापस भी की गई लेकिन जून 2024 में एकाएक कंपनी के कई कार्यालय बंद होने लगे। लोगों ने अपने रिटर्न के बारे में जानकारी मांगी तो एजेंट भी कोई जवाब नहीं दे पाए। इस पर कोटद्वार कोतवाली में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद लगातार लोग सामने आए और पूरे प्रदेश मे कुल 18 प्राथमिकी दर्ज की गईं। प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी और कुल 10 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई।
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इसके बाद एक याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए। नवंबर 2025 में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और आरोपियों की गिरफ्तारियां शुरू कीं। गत 12 और 13 मई को पांच आरोपियों ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव, सुशील गोखरू और राजेंद्र सिंह बिष्ट को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपी इस वक्त सुद्धोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
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