युवा दिवस: क्लबिंग नहीं...भजन नाइट्स बन रही युवाओं की पसंद, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ट्रेंड के रूप में उभर रहा
बदलते दौर में आज क्लबिंग नहीं भजन नाइट्स युवाओं की पसंद बन रहा है। भजन क्लबिंग आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ट्रेंड के तौर पर उभर रहा है।
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आधुनिक युग में भजन नाइट्स युवाओं की पसंद बनने लगा है। भले शहर में नए-नए क्लब खुल रहे हैं लेकिन भजन क्लबिंग की युवाओं की पसंद आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ट्रेंड के तौर पर उभर रही है। यही वजह है कि मंदिरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अब युवा धार्मिक गीतों और भजनों का आनंद लेते दिख रहे हैं।
बदलते वक्त के साथ युवाओं की पसंद में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले क्लबिंग और नाइटलाइफ का शौक युवाओं में था, वहीं अब वे धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं। खासकर, भजन नाइट्स का क्रेज अब युवा पीढ़ी में बढ़ता जा रहा है, जहां लोग देर रात तक धार्मिक गीतों और भजनों का आनंद ले रहे हैं।
यह आयोजन खासकर उन युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जो मानसिक शांति और सुकून की तलाश में रहते हैं। संगठनों और धार्मिक संस्थाओं की ओर से आयोजित इन भजन नाइट्स में पारंपरिक भजन से लेकर समकालीन भक्ति संगीत तक, हर प्रकार के भजन प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कई बार इन आयोजनों में बॉलीवुड गायकों का भी प्रदर्शन होता है, जो युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं।
तनाव कम करने के उपायों की ओर बढ़ते हुए कदम का संकेत
प्राचीन टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज ने कहा, पारंपरिक क्लबों के बजाए, इन भजन नाइट्स में शांति और आत्मिक संतुष्टि का अनुभव होता है। युवाओं में यह बदलाव मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और तनाव कम करने के उपायों की ओर बढ़ते हुए कदम का संकेत है।
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वहीं, राजपुर रोड निवासी रोहन अरोड़ा ने कहा, पहले हम दोस्तों के साथ क्लब जाते थे, लेकिन अब हम भजन नाइट्स में जाते हैं। यहां न केवल हम अच्छे गाने सुनते हैं, बल्कि आत्मिक शांति भी महसूस करते हैं। इस तरह के आयोजन धीरे-धीरे शहर में एक नए ट्रेंड के रूप में उभरते जा रहे हैं।