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Chamoli: मलारी-टिम्मरसैंण में स्कीइंग की अपार संभावनाएं, औली में कम बर्फबारी के चलते तलाशे जा रहे नए क्षेत्र

संवाद न्यूज एजेंसी, ज्योतिर्मठ (चमोली) Published by: Renu Saklani Updated Fri, 27 Feb 2026 11:37 AM IST
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सार

अपर मलारी और टिम्मरसैंण में स्कीइंग की अपार संभावनाएं हैं। औली क्षेत्र में हो रही कम बर्फबारी के चलते नए स्कीइंग क्षेत्र तलाशे जा रहे हैं।

New skiing areas Upper Malari and Timmersain offer immense skiing potential Chamoli Uttarakhand news
औली - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

सीमांत क्षेत्र नीती में भविष्य के लिए स्कीइंग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। अपर मलारी और टिम्मरसैंण में प्राकृतिक स्लोप हैं। क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि यहां आधारभूत सुविधाएं विकसिल की जाएं तो यहां के स्लोप अंतरराष्ट्रीय सतर के मानकों को पूरा कर सकते हैं।

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औली में पिछले कई वर्षों से कम बर्फबारी के चलते स्कीइंग खेलों के आयोजन में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग से जुड़े चार सदस्यीय दल नीती घाटी में भविष्य की संभावनाओं को तलाशने के लिए गया। दल बृहस्पतिवार को वहां से लौट आया। दल का नेतृत्व करने वाले अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग खिलाड़ी विवेक पंवार ने बताया कि केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत गांवों में पर्यटन व स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

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ताकि सीमांत क्षेत्रों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।उन्होंने बताया कि हम यहां स्कीइंग की संभावनाओं को तलाशने गए थे। यहां अपर मलारी में स्थित पर्वतीय ढलानों का विस्तृत निरीक्षण किया। यहां की पहाड़ियां स्कीइंग के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। यहां भविष्य में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए स्लोप विकसित हो सकते हैं। इसी तरह से टिम्मरसैंण महादेव के समीप भी उत्कृष्ट प्राकृतिक स्लोप हैं। इन क्षेत्रों में रोपवे, स्की लिफ्ट, प्रशिक्षण केंद्र, सुरक्षा व्यवस्थ जैसे सुविधाओं को विकसित करके इनको अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों तक पहुंचाया जा सकता है।

लंबे समय तक रहती है बर्फ

- विशेषज्ञों का मानना है कि नीती घाटी का तापमान सर्दियों में काफी कम हो जाता है। यहां गिरने वाली बर्फ लंबे समय तक रहती है। कम तापमान के चलते यहां गिरी बर्फ की गुणवत्ता भी स्कीइंग प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर है।

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लद्दाख, स्पीति व किन्नौर की तर्ज पर हो विकसित

--विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र को भविष्य में लद्दाख, स्पीति और किन्नौर की तर्ज पर विकसित कर स्कीइंग व आइस स्केटिंग रिंग जैसी सुविधाएं मुहैया करायी जा सकती हैं। माइनस तापमान के चलते यहां पानी का जमना आम बात है। ऐसे में कृत्रिम आइस रिंग बनाना तकनीकी रूप से सरल और कम खर्चीला हो सकता है।

 

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