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Chamoli: स्पेन की जेमा अपनी पीठ पर ढो रहीं हिमालय का कचरा, 2023 में योग सीखने और पहाड़ घूमने थी आई

विमल सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 02 Jan 2026 11:46 AM IST
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सार

स्पेन की जेमा अपनी पीठ पर हिमालय का कचरा ढो रहीं हैं। वह वर्ष 2023 में योग सीखने व पहाड़ घूमने आईं थी, लेकिन यहां कूड़ा देखकर हैरान रह गई।

Spain Gemma is carrying Himalayan waste on her back came in 2023 to learn yoga and explore mountains Chamoli
जेमा कोलेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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स्पेन में ग्राफिक डिजाइनर जेमा कोलेल पहाड़ घूमने के लिए उत्तराखंड आईं लेकिन जब यहां हिमालयी क्षेत्र में फैले कूड़े को देखा तो वह हैरान रह गईं। उसने उसी पल तय कर लिया कि हिमालय को न सिर्फ साफ करेंगी बल्कि इसके लिए लोगों को भी जागरूक करेंगी। दो साल से यहां रह रहीं जेमा हिमालय में फैलाए कचरे को एकत्रित कर अपनी पीठ पर ढोकर सड़क तक लाती हैं।

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जेमा (30) स्पेन कोलेल में ग्राफिक डिजाइनर हैं। वर्ष 2023 में वह योग सीखने और पहाड़ घूमने के लिए उत्तराखंड आईं। ऋषिकेश में उन्होंने योग सीखा और फिर पहाड़ घूमने के लिए निकल पड़ीं। इसके लिए उन्होंने चमोली जिले के लोहाजंग निवासी मनोज राणा से संपर्क किया। वह पर्वतारोहण करवाते हैं।

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जेमा पहाड़ों में आईं तो यहां छोटे से लेकर ऊंची चोटियों पर फैले कूड़े को देखकर हैरान रह गईं। इसके बाद उन्होंने यहां की सफाई की ठानी और हिमालयी क्षेत्र में सफाई का अभियान शुरू कर दिया। मनोज राणा इस अभियान में उनके साथ आ गए। अभी तक वे उच्च हिमालय से 300 किलो से अधिक प्लास्टिक कचरा पीठ पर ढोकर नीचे ला चुकी हैं। लोहाजंग में रहकर जेमा स्थानीय लोगों को भी हिमालय को साफ रखने के लिए जागरूक कर रही हैं। 

संभले नहीं तो तस्वीरों में ही रह जाएगा हिमालय

- जेमा कहती हैं कि हिमालय में इस तरह का कूड़ा फेंकना बहुत खतरनाक हो सकता है। यदि इसके प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हिमालय को वास्तविक रूप में नहीं देख पाएगी। वह बस तस्वीरों तक ही सीमित रह जाएगा।

स्पेन में साथ लेकर चलते हैं अपना कूड़ा

- जेमा कहती हैं कि उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है लेकिन लोग जिसे देवभूमि मानते हैं उसे ही गंदा कैसे कर सकते हैं। स्पेन में हम अपना कूड़ा अपने साथ लेकर चलते हैं लेकिन यहां लोगों में यह आदत नहीं दिखी। यदि हम अपना कूड़ा अपने साथ ले आएं तो सभी पहाड़ खुद ही साफ हो जाएंगे। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि जहां एक बार सफाई करते हैं वहां दोबारा जाने पर फिर कूड़ा फैला मिल जाता है।

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स्कूलों में चला रहे जागरूकता कार्यक्रम

- जेमा और मनोज राणा ने एक ग्रुप बनाया है जिसे नाम दिया है द 108 पीक क्लीन माउंटेन सेफ माउंटेन। इस ग्रुप के माध्यम से वे पर्वतारोहण भी करवाते हैं। लोग इसमें वालंटियर के तौर पर जुड़कर उनके साथ सफाई में सहयोग भी करते हैं। साथ ही जेमा और मनोज स्कूलों में जाकर बच्चों को और गांवों में लोगों को भी हिमालय की सफाई और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जागरूक कर रहे हैं। वह अभी तक लोहाजंग की आसपास की चोटियों के साथ ही लार्ड कर्जन ट्रैक, ऑली व वेदनी बुग्याल, चंद्रशिला, धर्मावली आदि जगह पर सफाई अभियान चला चुकी हैं। इसके अलावा 7120 मीटर ऊंचाई पर स्थित त्रिशूल, 7242 मीटर पर स्थित मुकुट पर्वत को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं।

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