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ओजोन दिवस: श्रीनगर गढ़वाल में 26 दिन खराब रही हवा, चिंता बढ़ाने वाले हैं वायु गुणवत्ता के आंकड़े

Wed, 16 Sep 2026 01:53 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी,श्रीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी,श्रीनगर। Published by: Renu Saklani Updated Wed, 16 Sep 2026 01:53 PM IST
सार

हिमालय की गोद में बसे श्रीनगर की हवा को लेकर सामने आए एक साल के आंकड़े तस्वीर का दूसरा पहलू दिखा रहे हैं। प्रदूषण के महीन कणों के साथ ओजोन का बढ़ा स्तर भी शहर की वायु गुणवत्ता के लिए चिंता का कारण बना है।

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Srinagar Air Quality PM2.5 Above Safe Limit for 169 Days, Ozone Crossed Limit on 26 Days Ozone Day
ओजोन - फोटो : एएनआई

विस्तार

हिमालयी क्षेत्र की हवा को साफ-सुथरी मानने की धारणा के बीच श्रीनगर की वायु गुणवत्ता के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि की हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला के एक साल के अध्ययन में पीएम-2.5 और पीएम-10(वायु में मौजूद बहुत छोटे और ठोस कण व तरल बूंदें) प्रमुख प्रदूषक पाए गए। वहीं 26 दिनों में ओजोन का स्तर भी निर्धारित सीमा से अधिक रहा।

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15 सितंबर 2025 से 15 सितंबर 2026 तक के 339 वैध दिनों के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर मंगलवार को भौतिकी विभाग, चौरास परिसर में पांचवां ग्रीनहाउस गैस एवं वायु गुणवत्ता सूचना बुलेटिन जारी किया गया। अध्ययन के अनुसार पीएम-2.5 की औसत सांद्रता 73.30 माइक्रोग्राम और पीएम-10 की 100.48 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। पीएम-2.5 की मात्रा 169 दिन और पीएम-10 की मात्रा 146 दिन निर्धारित 24 घंटे की सीमा से अधिक रही।

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सबसे चौंकाने वाली स्थिति 19 दिसंबर 2025 को सामने आई, जब ओजोन का आठ घंटे का औसत 634.13 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया। इसी दिन प्रति घंटे ओजोन की सांद्रता 880 माइक्रोग्राम से अधिक दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दियों में घाटी में प्रदूषकों के फंसने, स्थानीय स्तर पर बायोमास जलाने और मौसमीय परिस्थितियों से इस घटना का संबंध हो सकता है।

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भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. त्रिलोक चंद्र उपाध्याय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ समाज तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने डॉ. गौतम और उनकी शोध टीम अमनदीप विश्वकर्मा, अंकित कुमार और सरस्वती रावतको जनहितकारी वैज्ञानिक पहल के लिए बधाई दी।

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मौसम के अनुसार प्रदूषण के स्तर में देखा गया बदलाव

हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला के अन्वेषक डॉ. आलोक सागर गौतम ने कहा कि अध्ययन में मौसम के अनुसार प्रदूषण के स्तर में बदलाव भी सामने आया। सर्दियों में तापमान प्रतिलोमन के कारण पीएम बढ़ा, जबकि गर्मियों में अधिक तापमान और सौर विकिरण से ओजोन का स्तर बढ़ा। मानसून में बारिश के कारण पीएम अपेक्षाकृत कम रहा। कार्बन मोनोऑक्साइड भी 22 दिन निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज हुआ। कहा कि धरातल के पास अधिक मात्रा में मौजूद ओजोन हानिकारक वायु प्रदूषक है।

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