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Dehradun News: विवि की लचर कार्यप्रणाली से छात्रों में रोष, कुलपति को भेजा ज्ञापन
Tue, 18 Aug 2026 01:49 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:49 AM IST
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श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की लचर प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं से त्रस्त डाकपत्थर स्थित वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा है। छात्रों ने सोमवार को नौ सूत्रीय मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति को एक ज्ञापन प्रेषित किया। इसमें पुनर्मूल्यांकन शुल्क में की गई बेतहाशा वृद्धि को वापस लेने और परीक्षा देने के बावजूद छात्रों को अनुपस्थित दर्शाने जैसी गंभीर खामियों को तत्काल दूर करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि विश्वविद्यालय की लचर कार्यप्रणाली के कारण प्रवेश प्रक्रिया से लेकर परीक्षा परिणामों तक में भारी विसंगतियां हैं। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य के शैक्षणिक अवसरों पर पड़ रहा है। छात्रों ने मांग की है कि पुनर्मूल्यांकन शुल्क इतना कम होना चाहिए कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी इसका लाभ उठा सकें। इसके अलावा, उन सभी मामलों की जांच कर तुरंत संशोधित परिणाम जारी किए जाएं, जिनमें परीक्षा देने के बावजूद छात्रों को अनुपस्थित दिखा दिया गया है। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि आदित्य गुप्ता, छात्रसंघ अध्यक्ष तुषार कपूर, वंश रावत, ऋषिका चौहान, शुभम तोमर, आर्यन तोमर और प्रियांशु सहित कई छात्र शामिल रहे।
ये हैं अन्य प्रमुख मांगें
- नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत पीजी स्तर पर एक वर्षीय ऑनर्स कार्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
- छात्रों की अंकतालिकाएं बिना विलंब के सीधे महाविद्यालयों को भेजी जाएं।
- आरटीआई के तहत मांगी गई उत्तरपुस्तिकाएं तय समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएं।
- समर्थ पोर्टल पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
- बैक परीक्षाओं के परिणाम अतिशीघ्र घोषित हों।
- स्नातक छठे सेमेस्टर में 132 क्रेडिट पूरे करने वाले छात्रों की आरएल/ओवरऑल फेल समस्या का तुरंत निवारण हो।
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ज्ञापन में छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि विश्वविद्यालय की लचर कार्यप्रणाली के कारण प्रवेश प्रक्रिया से लेकर परीक्षा परिणामों तक में भारी विसंगतियां हैं। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य के शैक्षणिक अवसरों पर पड़ रहा है। छात्रों ने मांग की है कि पुनर्मूल्यांकन शुल्क इतना कम होना चाहिए कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी इसका लाभ उठा सकें। इसके अलावा, उन सभी मामलों की जांच कर तुरंत संशोधित परिणाम जारी किए जाएं, जिनमें परीक्षा देने के बावजूद छात्रों को अनुपस्थित दिखा दिया गया है। ज्ञापन प्रेषित करने वालों में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि आदित्य गुप्ता, छात्रसंघ अध्यक्ष तुषार कपूर, वंश रावत, ऋषिका चौहान, शुभम तोमर, आर्यन तोमर और प्रियांशु सहित कई छात्र शामिल रहे।
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ये हैं अन्य प्रमुख मांगें
- नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत पीजी स्तर पर एक वर्षीय ऑनर्स कार्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
- छात्रों की अंकतालिकाएं बिना विलंब के सीधे महाविद्यालयों को भेजी जाएं।
- आरटीआई के तहत मांगी गई उत्तरपुस्तिकाएं तय समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएं।
- समर्थ पोर्टल पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
- बैक परीक्षाओं के परिणाम अतिशीघ्र घोषित हों।
- स्नातक छठे सेमेस्टर में 132 क्रेडिट पूरे करने वाले छात्रों की आरएल/ओवरऑल फेल समस्या का तुरंत निवारण हो।