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Uttarakhand: विडंबना! प्रदेश में नए सरकारी स्कूल खुले नहीं, पांच हजार कर रहे बंद होने का इंतजार

Mon, 17 Aug 2026 03:39 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 17 Aug 2026 03:39 PM IST
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Uttarakhand News No new government schools have opened while 5000 are awaiting closure
- फोटो : Freepik.com

प्रदेश में नए प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल खुले नहीं, लेकिन जो हैं उनमें भी करीब पांच हजार स्कूल बंद होने के कगार पर हैं। इनमें छात्र-छात्राओं की संख्या 10 या फिर इससे भी कम रह गई है। यह हाल तब है जबकि शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के नाम पर कई दावे किए जाते रहे हैं।

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सरकारी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने के बजाय कम होती जा रही है। स्थिति यह है कि प्राथमिक विद्यालयों की बात करे तो 4275 स्कूलों में छात्रों की संख्या 10 या इससे भी कम रह गई है। इसमें ऐसे भी स्कूल हैं जिनमें कुछ स्कूलों में छात्र संख्या एक तो कुछ में तीन या चार रह गई है। जबकि जूनियर हाईस्कूलों में करीब 650 स्कूलों में छात्र संख्या 10 या इससे कम है। सरकारी स्कूलों के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है। विद्यालयी शिक्षा का वार्षिक बजट करीब 12 हजार करोड़ का है। इसके बाद भी स्कूलों की इस स्थिति से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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2940 स्कूलों में 20 या इससे कम हैं छात्र
राज्य के 2940 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या 20 या फिर इससे कम रह गई है। वहीं, 1327 स्कूलों में छात्रों की संख्या 30 या इससे कम है। जबकि 1062 स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या 50 या इससे कम है।
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स्कूलों के लिए चलाई जा रही योजनाएं
प्रदेश में शिक्षा गुणवत्ता के नाम पर समग्र शिक्षा योजना, प्रधानमंत्री पोषण योजना, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना, बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना सहित कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके अलावा अटल उत्कृष्ट विद्यालय तो कभी पीएम श्री स्कूल एवं क्लस्टर विद्यालय आदि के नाम पर नए प्रयोग होते रहे हैं, इसके बाद भी छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने के बजाय घट रही है।

छात्रों की घटती संख्या की एक नहीं कई प्रमुख वजह है, स्कूल भवन जर्जर हैं, कई में बुनियादी सुविधाएं नहीं है, शिक्षकों की कमी है, जो हैं उनकी गैर शैक्षिणक कार्यों में डयूटी लगाई जा रही है, इसके अलावा आरटीई के तहत 25 फीसदी बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना और पलायन भी एक वजह है।
-विनोद थापा, प्रांतीय अध्यक्ष जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ

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