शहरी विकास विभाग: UKPSC से आए नौ EO को बना दिया प्रभारी सहायक नगर आयुक्त, सफाई निरीक्षकों को बनाया प्रभारी ईओ
शहरी विकास विभाग के पास पूर्व में ईओ की कमी रही, जिसको आधार बनाकर दूसरे संवर्ग के कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाया गया।
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शहरी विकास विभाग का प्रभारी व्यवस्था पर इस कदर भरोसा है कि जो अधिशासी अधिकारी (ईओ) उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से चुनकर आए उन्हें नगर पालिका-नगर पंचायत के बजाए नगर निगमों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त (एसएनए) बना दिया और उनकी जगह खाली हुए पदों पर क्लर्क, सफाई निरीक्षकों को प्रभारी ईओ बना दिया। 2021 की सीएजी रिपोर्ट में भी इस अव्यवस्था पर सवाल उठ चुके हैं।
शहरी विकास विभाग के पास पूर्व में ईओ की कमी रही, जिसको आधार बनाकर दूसरे संवर्ग के कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाया गया। लेकिन वर्ष 2024 में निदेशालय को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से चुनकर आए 51 अधिशासी अधिकारी मिल गए।
निदेशालय इनको नगर पालिका, नगर पंचायतों में तैनात करने के लिए अब भी प्रतिबद्ध नजर नहीं आ रहा है। अमर उजाला की पड़ताल में नौ ऐसे नए ईओ का पता चला, जो नियमानुसार तो पालिका-पंचायत में होने चाहिएं थे लेकिन निदेशालय ने वहां से हटाकर उन्हें नगर निगमों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त बना दिया। इनकी जगह जो पद खाली हुए, वहां अपनी मनमर्जी से क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बना दिया।
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इन ईओ को निकायों से हटाकर निगमों में बना दिया प्रभारी एसएनए
- ईओ का नाम- प्रभारी एसएनए
- शालिनी नेगी- नगर निगम काशीपुर
- दीपा परिहार- नगर निगम पिथौरागढ़
- सुनील वर्मा- नगर निगम श्रीनगर
- अमन कुमार- नगर निगम ऋषिकेश
- अंजली रावत- नगर निगम हरिद्वार
- शालिनी- नगर निगम हल्द्वानी
- रणदीप- नगर निगम रुद्रपुर
- गजेंद्र पाल- नगर निगम हल्द्वानी
- शिवानी- नगर निगम रुड़की
2021 की सीएजी रिपोर्ट में भी जताई जा चुकी आपत्ति
कैग की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 2021 में भी शहरी विकास विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में नियमित अधिशासी अधिकारियों की कमी का हवाला देकर अन्य संवर्गों के कर्मचारियों को ईओ का प्रभार सौंप दिया गया। सफाई निरीक्षक, क्लर्क, कर अधीक्षक और प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को बिना किसी स्पष्ट नीति या वरिष्ठता का पालन किए रैंडम तरीके से प्रभारी ईओ बना दिया गया था। विभाग ने इसके पीछे ईओ की कमीं का हवाला दिया था लेकिन 51 नए ईओ आने के बाद भी हालात पहले जैसे ही हैं। मामले में निदेशक शहरी विकास एवं अपर सचिव विनोद गिरी गोस्वामी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनका जवाब नहीं मिला। जब पक्ष आएगा तो वह भी प्रकाशित किया जाएगा।