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विरासत महोत्सव में विंटेज कार रैली: दून की सड़कों पर दौड़ी इतिहास की धरोहर, लोकनृत्यों ने बांधा समा
Sun, 25 Oct 2026 10:00 PM IST
Alka Tyagi
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: Alka Tyagi
Updated Sun, 25 Oct 2026 10:00 PM IST
सार
सांस्कृतिक कार्यक्रम में जौनसार बावर के कलाकारों ने आकर्षक लोकगीतों व नृत्यों से विरासत की महफिल में रंग जमा दिया। साथ ही बहार-ए-लखनऊ की नृत्य श्रृंखला में कृष्णा मोहन की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
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विंटेज कार रैली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
विरासत महोत्सव के तीसरे दिन दून की सड़कों पर इतिहास की धरोहर दौड़ती हुई दिखी। विंटेज कार रैली में दुपहिया और चारपहिया वाहन दिन भर आकर्षण का केंद्र बन रहे। इन सभी वाहनों के मॉडल देश ही नहीं विदेशों के भी रहे। वहीं, शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोकनृत्यों ने समां बांध दिया।
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हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र नींबूवाला में आयोजित विरासत से शुरू हुई रैली सेवन ओक्स स्कूल, ओएनजीसी चौक, किशननगर, चकराता रोड, बिंदाल से होते हुए घंटाघर पहुंची और वहां से चकराता रोड, बिंदाल पुल से होकर वापस विरासत महोत्सव में पहुंची।
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वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रम में जौनसार बावर के कलाकारों ने आकर्षक लोकगीतों व नृत्यों से विरासत की महफिल में रंग जमा दिया। साथ ही बहार-ए-लखनऊ की नृत्य श्रृंखला में कृष्णा मोहन की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। देवेंद्र रावत के निर्देशन में 20 सदस्यीय दल ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से क्षेत्र की लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक को बहुत ही खूबसूरती के साथ पेश किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत महासू वंदना से हुई, जबकि समापन नाटी नृत्य के साथ किया गया। इस दौरान दल का प्रसिद्ध पारंपरिक नृत्य तांडी भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। दल में विनोद कुमार रलसिंगा, अमित ढोल पर, विनोद दुमाऊं पर, अनुज कीबोर्ड पर बने रहे, जबकि गिटार पर सोनू, ढोलक पर प्रिंस व आशीष नेगी ने पैड पर संगत शानदार रूप में दी। वहीं, गायन की जिम्मेदारी अनुप चंद, सचिन वर्मा और मोनिका आर्या ने संभाली।
नृत्य दल में नितिन दयाल, सूरज वर्मा, विशाल वर्मा, सुभाष खन्ना, मनोज वर्मा, आंचल वर्मा, मिलन वर्मा, वंशिका दयाल, आरती नेगी और प्रकृति मेहरा शामिल रहे। इसके अलावा कृष्ण मोहन की नृत्य प्रस्तुति बहारे लखनऊ के जरिए लखनऊ की संस्कृति, अदब और नवाबी दौर की कहानियों को मंच पर उतारा गया।
इस प्रस्तुति की कोरियोग्राफी और निर्देशन कृष्ण मोहन ने किया। इसमें वाजिद अली शाह के दौर के संदर्भ में लखनऊ की कहानी को नृत्य और संगीत के माध्यम से बयां किया गया, जिसमें उस समय की सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक परंपराओं की झलक देखने को मिली।