Uttarkashi: आफत बनकर रही बारिश, मांडो गांव के गदेरे में बढ़ा जलस्तर, आवासीय बस्ती में पानी घुसने से सहमे लोग
प्रदेश में भारी बारिश आफत बनकर बरस रही है। मांडो गांव के गदेरे में जलस्तर बढ़ने से लोग सहम गए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मांडो गांव के गदेरे में जलस्तर बढ़ने से लोग सहम गए। इससे पानी सड़क पार कर आवासीय बस्ती में घुस गया। लोगों को आपदा के डर से रातभर जागना पड़ा। बुधवार सुबह स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर गदेरे से आवाजाही करनी पड़ी।
ग्रामीणों का कहना है कि मांडो में तीन विभागों ने सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए हैं। वर्ष 2021 में आई आपदा के कारण मांडो-तेखला सड़क का मोटर पुल बह गया था। उस आपदा में तीन लोगों की जान चली गई थी। कई घर भी मलबे में दब गए थे। आपदा के छह वर्ष बाद भी वहां पुल सहित सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। मांडो निवासी सरिता भट्ट, उर्मिला भट्ट और इंद्रेश उनियाल ने बताया कि गदेरे का जलस्तर बढ़ते ही उन्हें रातभर जागना पड़ता है।
सुरक्षा उपाय नहीं हुए
लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और लघु सिंचाई विभाग ने सड़क सुरक्षा के लिए वायरक्रेट व चेकडेम का निर्माण किया था लेकिन लोक निर्माण विभाग का पुस्ता और लघु सिंचाई का चेकडेम पहली बरसात में ही क्षतिग्रस्त हो गया। सिंचाई विभाग द्वारा लगाई गई करीब दस वायरक्रेट दीवारों की ऊंचाई केवल दो से तीन फीट है। इस कम ऊंचाई के कारण गदेरे का पूरा पानी सड़क पर आने के बाद आवासीय बस्ती में घुस रहा है। यह स्थिति सुरक्षा उपायों की प्रभावहीनता दर्शाती है और सरकारी धन के दुरुपयोग का संकेत देती है।
ये भी पढे़ं...हाई अलर्ट: उत्तराखंड में 85 मार्ग बंद, मलबे में दबी कार, खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं अलकनंदा-मंदाकिनी
ग्रामीणों ने कई बार पुल के पुनर्निर्माण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग की है। हालांकि उनकी मांगों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बजाय, सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण स्थायी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि उन्हें हर साल इस आपदा का सामना न करना पड़े। वे चाहते हैं कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान दे।