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नंदा का साहस: पिता के हाथ डगमगाए तो बेटी ने संभाला स्टेयरिंग, ऐसे चला रही गृहस्थी की गाड़ी

कृष्णकांत मणि त्रिपाठी, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 14 Jun 2026 02:26 PM IST
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सार

परिवार में जब परिस्थियां विपरीत हुईं तो बेटी ने पिता का साथ दिया और खुद लोडर चलाना शुरू कर दिया। 

When Her Father Hands Wavered Daughter Took the Steering Wheel Steering Family Through Life Journey
बेटी ने चलाया लोडर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

परिवार पर जब संकट आया तो नंदा यादव ने पढ़ाई छोड़ लोडर का स्टेयरिंग संभाल लिया। अब वह बीमार पिता राजेश और मां आरती के खर्च के साथ वाहन और मकान की किस्त भी चुका रही है। वर्ष 2024 में पिता की तीसरी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद नंदा ने यह जिम्मेदारी ऐसे संभाली जो अन्य बेटियों के लिए प्रेरणादायक है।



सराय निवासी राजेश और आरती ने पहले उद्योगों में नौकरी कर अपने बच्चों नंदा और जितेंद्र का पालन-पोषण किया। नौकरी छूटने के बाद राजेश ने लोडर खरीदकर अपना कारोबार शुरू किया। हालांकि समय उनके पक्ष में नहीं रहा और उनकी दो गाड़ियां दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गईं।
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उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कर्ज लेकर तीसरी गाड़ी खरीदी, जो 2024 में चालक के नशे में होने पर हरिद्वार के चंडी चौक के पास पलट गई। इसमें बीमार राजेश को फिर भारी नुकसान हुआ। यह देख दसवीं तक पढ़ी नंदा ने खुद लोडर चलाना शुरू कर दिया। अब उनका भाई जितेंद्र गांव में गृहस्थी संभाल रहा है। नंदा ऋषिकेश, देहरादून, चंपावत, पिथौरागढ़ और हरियाणा तक माल भाड़ा लेकर जाती हैं।
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मां का सुरक्षा कवच बेटी के हिम्मत में सहारा
नंदा जब माल भाड़े के लिए वाहन लेकर निकलती हैं तो उनकी मां आरती क्लीनर की सीट पर बैठी होती हैं। आरती न केवल क्लीनर का काम करती हैं, बल्कि वह अपनी बेटी का सुरक्षा कवच भी हैं। मां आरती का कहना है कि समाज में कई तरह के लोग होते हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता, बस उन्हें हिम्मत और साहस के साथ अपने चुने हुए क्षेत्र में उतरने देना चाहिए। आरती को विश्वास है कि जब वाहन की किस्त पूरी हो जाएगी और राजेश स्वस्थ हो जाएंगे, तो वे नंदा की आगे की पढ़ाई और भविष्य की योजना बनाएंगे।

कंप्यूटर के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं नंदा
लोडर चलाकर माता-पिता का सहारा बनी नंदा का लक्ष्य माता-पिता को सही दशा में लाकर इंटर के बाद कंप्यूटर के क्षेत्र में कुछ बेहतर सीखना है। नंदा का मानना है कि कलियुग कलाओं का आधार है। इसमें जितनी कला जिसको आती है, वही उसके जीविका का आधार बन सकता है। वह जहां से भी बुकिंग आती है, अपनी मां को लेकर निकल पड़ती है।

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