{"_id":"6a7b531c99ba08bdbe0daf29","slug":"21st-edition-of-saare-jahan-se-achha-concludes-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-150305-2026-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: सारे जहां से अच्छा का 21वां संस्करण संपन्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: सारे जहां से अच्छा का 21वां संस्करण संपन्न
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन शास्त्रीय नृत्य शैलियों का संगम
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को समर्पित दो दिवसीय सारे जहां से अच्छा समारोह का 21वां संस्करण मंगलवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। पद्मश्री गुरु रंजना गौहर के नेतृत्व में उत्सव एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसायटी ने इसका आयोजन किया। समारोह में ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुतियां दी गईं।
समारोह की दूसरी शाम गुरु रंजना गौहर के शिष्यों ने ओडिसी नृत्य प्रस्तुत किया। पद्मश्री गुरु आनंद शंकर जयंती और उनके हैदराबाद के शिष्यों ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। गुरु रतिकांत महापात्र और भुवनेश्वर के उनके शिष्यों ने भी ओडिसी का प्रदर्शन किया। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु राजेंद्र गंगानी और दिल्ली के उनके शिष्यों ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। मंच पर तीनों नृत्य शैलियों की अलग-अलग रंगत और लय दिखी। इन प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गुरु-शिष्य परंपरा को दर्शाया।
समारोह के पहले दिन गुरु रंजना गौहर की नृत्य-नाटिका चितरांगदा - द वॉरियर प्रिंसेस प्रस्तुत की गई। यह रवींद्रनाथ टैगोर की महाभारत आधारित रचना से प्रेरित थी। इसमें स्त्रीत्व, साहस, आत्मबोध, गरिमा और समानता जैसे विषय मंच पर रखे गए। विभिन्न नृत्य शैलियों के बावजूद, प्रस्तुतियों में भारतीय सांस्कृतिक एकता का साझा भाव दिखा। यह भारतीय संस्कृति की निरंतरता को भी दर्शाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को समर्पित दो दिवसीय सारे जहां से अच्छा समारोह का 21वां संस्करण मंगलवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। पद्मश्री गुरु रंजना गौहर के नेतृत्व में उत्सव एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसायटी ने इसका आयोजन किया। समारोह में ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुतियां दी गईं।
समारोह की दूसरी शाम गुरु रंजना गौहर के शिष्यों ने ओडिसी नृत्य प्रस्तुत किया। पद्मश्री गुरु आनंद शंकर जयंती और उनके हैदराबाद के शिष्यों ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। गुरु रतिकांत महापात्र और भुवनेश्वर के उनके शिष्यों ने भी ओडिसी का प्रदर्शन किया। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु राजेंद्र गंगानी और दिल्ली के उनके शिष्यों ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया। मंच पर तीनों नृत्य शैलियों की अलग-अलग रंगत और लय दिखी। इन प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गुरु-शिष्य परंपरा को दर्शाया।
विज्ञापन
समारोह के पहले दिन गुरु रंजना गौहर की नृत्य-नाटिका चितरांगदा - द वॉरियर प्रिंसेस प्रस्तुत की गई। यह रवींद्रनाथ टैगोर की महाभारत आधारित रचना से प्रेरित थी। इसमें स्त्रीत्व, साहस, आत्मबोध, गरिमा और समानता जैसे विषय मंच पर रखे गए। विभिन्न नृत्य शैलियों के बावजूद, प्रस्तुतियों में भारतीय सांस्कृतिक एकता का साझा भाव दिखा। यह भारतीय संस्कृति की निरंतरता को भी दर्शाता है।
विज्ञापन