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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   4,659 tonnes of waste in Delhi remains undisposed of daily, and untreated sewage continues to flow into the Yamuna.

Delhi NCR News: दिल्ली में रोज 4,659 टन कचरा बिना निस्तारण, यमुना में अब भी पहुंच रहा बिना उपचार का सीवेज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 05:35 PM IST
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2028 तक कचरा और यमुना प्रदूषण पर लगाम की तैयारी, एनजीटी में सरकार ने पेश किया रोडमैप
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छह नए कचरा प्रबंधन प्रोजेक्ट और कई बायो-सीएनजी संयंत्र होंगे तैयार, 2028 तक एसटीपी क्षमता बढ़ाने और नए संयंत्र लगाने का लक्ष्य
नितिन राजपूत

नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ते कचरे और यमुना नदी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में वर्ष 2028 तक ठोस कचरा प्रबंधन और सीवेज व्यवस्था को मजबूत करने की कार्ययोजना दी गई है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को लेकर रिपोर्ट चिंता भी बढ़ाती है। इसमें कहा गया है कि राजधानी में अभी भी बड़ी मात्रा में कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है और बिना उपचार का सीवेज यमुना में पहुंच रहा है।
पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव सम्यक एस. जैन की ओर से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्रों से प्रतिदिन 12,862 टन ठोस कचरा निकलता है। इसमें से 12,500 टन कचरा अकेले एमसीडी क्षेत्र से आता है। वर्तमान में केवल 7,841 टन यानी करीब 63 प्रतिशत कचरे का ही निस्तारण हो रहा है, जबकि 4,659 टन (37 प्रतिशत) कचरा बिना प्रोसेसिंग के रह जाता है। वहीं, एनडीएमसी के 300 टन और दिल्ली कैंट बोर्ड के 62 टन कचरे का शत-प्रतिशत निस्तारण ओखला स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में किया जा रहा है।
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छह बड़े प्रोजेक्ट शुरू
रिपोर्ट के अनुसार, कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एमसीडी ने 7,650 टन प्रतिदिन अतिरिक्त क्षमता वाले छह बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। इनमें नरेला-बवाना में 3,000 टन क्षमता और गाजीपुर में 2,000 टन क्षमता के नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट शामिल हैं, जिन्हें दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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-इसके अलावा ओखला और तेहखंड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की क्षमता में 1,000-1,000 टन प्रतिदिन की बढ़ोतरी की जाएगी।
-ओखला में 300 टन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट तथा गाजीपुर में 350 टन क्षमता का कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।
-डेयरी कचरे के निस्तारण के लिए नांगली डेयरी में संयंत्र पहले से संचालित है, जबकि गोयला और घोघा डेयरी में 200-200 टन क्षमता के बायोगैस प्लांट लगाए जा रहे हैं।

सीवेज अब भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में प्रतिदिन 3,636 मिलियन लीटर (एमएलडी) यानी 363.6 करोड़ लीटर प्रतिदिन सीवेज उत्पन्न होता है, जो कुल जल आपूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत है। यही सीवेज विभिन्न नालों के जरिए यमुना नदी में पहुंचकर प्रदूषण का प्रमुख कारण बनता है।
-दिल्ली जल बोर्ड के पास 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,702 एमएलडी है। इनमें 3,387 एमएलडी (338.7 करोड़ लीटर प्रतिदिन) क्षमता का उपयोग हो रहा है, जबकि करीब 249 एमएलडी सीवेज बिना उपचार के यमुना में पहुंच रहा है। जांच में 29 एसटीपी निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए, सात संयंत्रों में सुधार की जरूरत बताई गई है और एक एसटीपी मरम्मत के कारण फिलहाल बंद है।


2028 तक क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2028 तक सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 814 एमजीडी (मिलियन गैलन डेली) यानी 30.8 अरब लीटर से बढ़ाकर 1,500 एमजीडी (56.75 अरब लीटर) करने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत दिसंबर 2027 तक नौ एसटीपी की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जून 2028 तक 29 नए विकेंद्रीकृत एसटीपी बनाए जाएंगे, जबकि दिसंबर 2028 तक बड़े नालों के साथ नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेन क्षेत्र में भी नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से कचरा प्रबंधन और यमुना में गिरने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सुधार होगा।
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