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Delhi NCR News: एनडीएमसी क्षेत्र में फिर से जिंदा होंगे 55 बोरवेल, बोर्ड ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली में पानी की किल्लत और जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को बड़ी राहत देते हुए 55 बंद पड़े बोरवेल दोबारा खोलने की सिफारिश की है। इस संबंध में बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल की। दरअसल, एनडीएमसी ने एनजीटी में अर्जी दाखिल कर 124 बंद बोरवेलों में से 57 को फिर से चालू करने की अनुमति मांगी थी। इन बोरवेलों का उपयोग पार्कों, सड़कों के किनारे हरियाली और बगीचों की सिंचाई के लिए किया जाना प्रस्तावित था।
सीजीडब्ल्यूबी ने अपनी जांच में पाया कि पहले भूजल स्तर काफी नीचे चला गया था, जिसके चलते एनजीटी के आदेश पर इन बोरवेलों को बंद कर दिया गया था। लेकिन, अब स्थिति बदल चुकी है। बोरवेल बंद होने के बाद कई इलाकों में भूजल स्तर ऊपर आ गया है। इसके कारण बेसमेंट में पानी भरने और सड़कों पर जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
बोर्ड ने वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया, जिसमें भूजल स्तर की निगरानी, पुराने आंकड़ों का विश्लेषण, वर्षा के रिकॉर्ड और मिट्टी की जांच शामिल थी। इसके आधार पर सिफारिश की गई कि 55 बोरवेल सीमित और नियंत्रित तरीके से फिर खोले जा सकते हैं। हालांकि, इनका उपयोग केवल पीने और घरेलू जरूरतों तक ही सीमित रखा जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भूजल का दोहन इस तरह किया जाए कि जल स्तर 10 मीटर से नीचे न जाए। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या अधिक है, वहां वर्षा जल संचयन और कृत्रिम रिचार्ज संरचनाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है। सीजीडब्ल्यूबी ने 37 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां पानी जमा होता है। इनमें से 20 जगहों पर विशेष रिचार्ज सिस्टम बनाने की सिफारिश की गई है, जिससे पानी जमीन में समा सके और जलभराव कम हो। राहत की बात यह है कि एनडीएमसी क्षेत्र में जमीन धंसने की कोई घटना सामने नहीं आई है।
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नई दिल्ली। दिल्ली में पानी की किल्लत और जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को बड़ी राहत देते हुए 55 बंद पड़े बोरवेल दोबारा खोलने की सिफारिश की है। इस संबंध में बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल की। दरअसल, एनडीएमसी ने एनजीटी में अर्जी दाखिल कर 124 बंद बोरवेलों में से 57 को फिर से चालू करने की अनुमति मांगी थी। इन बोरवेलों का उपयोग पार्कों, सड़कों के किनारे हरियाली और बगीचों की सिंचाई के लिए किया जाना प्रस्तावित था।
सीजीडब्ल्यूबी ने अपनी जांच में पाया कि पहले भूजल स्तर काफी नीचे चला गया था, जिसके चलते एनजीटी के आदेश पर इन बोरवेलों को बंद कर दिया गया था। लेकिन, अब स्थिति बदल चुकी है। बोरवेल बंद होने के बाद कई इलाकों में भूजल स्तर ऊपर आ गया है। इसके कारण बेसमेंट में पानी भरने और सड़कों पर जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
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बोर्ड ने वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया, जिसमें भूजल स्तर की निगरानी, पुराने आंकड़ों का विश्लेषण, वर्षा के रिकॉर्ड और मिट्टी की जांच शामिल थी। इसके आधार पर सिफारिश की गई कि 55 बोरवेल सीमित और नियंत्रित तरीके से फिर खोले जा सकते हैं। हालांकि, इनका उपयोग केवल पीने और घरेलू जरूरतों तक ही सीमित रखा जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भूजल का दोहन इस तरह किया जाए कि जल स्तर 10 मीटर से नीचे न जाए। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या अधिक है, वहां वर्षा जल संचयन और कृत्रिम रिचार्ज संरचनाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है। सीजीडब्ल्यूबी ने 37 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां पानी जमा होता है। इनमें से 20 जगहों पर विशेष रिचार्ज सिस्टम बनाने की सिफारिश की गई है, जिससे पानी जमीन में समा सके और जलभराव कम हो। राहत की बात यह है कि एनडीएमसी क्षेत्र में जमीन धंसने की कोई घटना सामने नहीं आई है।