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Delhi NCR News: हाथ कांपने की गंभीर बीमारी पर रिसर्च करेगा दिल्ली का निजी अस्पताल
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जेडएपी-एक्स सिस्टम से बिना चीर-फाड़ इलाज की संभावनाओं का होगा अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने गंभीर एसेंशियल ट्रेमर (हाथ-पैर कांपने की बीमारी) के लिए बिना चीर-फाड़ वाले नए इलाज पर क्लिनिकल रिसर्च शुरू करने की घोषणा की है। इस अध्ययन में जेडएपी-एक्स जाइरोस्कोपिक रेडियोसर्जरी सिस्टम की सहायता से उपचार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
एसेंशियल ट्रेमर में शरीर के किसी हिस्से, खासकर हाथों में लगातार कंपन होता है, जिससे लिखने, खाने और रोजमर्रा के कामों में कठिनाई होती है। अस्पताल के अनुसार, 40 वर्ष से अधिक उम्र के करीब चार से पांच प्रतिशत लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। ज्यादातर मामलों में दवाओं से कंपन को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन कुछ मरीजों में दवा के बावजूद कंपन बना रहता है।
शोध में दिमाग के उस हिस्से को रेडियोसर्जरी से निशाना बनाया जाएगा, जो प्रमुख हाथ के नियंत्रण से जुड़ा है, ताकि कंपन कम हो सके और मरीज की कार्यक्षमता बेहतर हो। अस्पताल के अनुसार, यह प्रक्रिया करीब एक घंटे की होती है। धातु के फ्रेम की जगह विशेष मेश मास्क का उपयोग किया जाएगा। आमतौर पर बेहोशी की जरूरत नहीं होती और मरीज उसी दिन घर जा सकता है। यह रिसर्च बीमारी के इलाज में एक नई उम्मीद जगा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने गंभीर एसेंशियल ट्रेमर (हाथ-पैर कांपने की बीमारी) के लिए बिना चीर-फाड़ वाले नए इलाज पर क्लिनिकल रिसर्च शुरू करने की घोषणा की है। इस अध्ययन में जेडएपी-एक्स जाइरोस्कोपिक रेडियोसर्जरी सिस्टम की सहायता से उपचार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
एसेंशियल ट्रेमर में शरीर के किसी हिस्से, खासकर हाथों में लगातार कंपन होता है, जिससे लिखने, खाने और रोजमर्रा के कामों में कठिनाई होती है। अस्पताल के अनुसार, 40 वर्ष से अधिक उम्र के करीब चार से पांच प्रतिशत लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। ज्यादातर मामलों में दवाओं से कंपन को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन कुछ मरीजों में दवा के बावजूद कंपन बना रहता है।
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शोध में दिमाग के उस हिस्से को रेडियोसर्जरी से निशाना बनाया जाएगा, जो प्रमुख हाथ के नियंत्रण से जुड़ा है, ताकि कंपन कम हो सके और मरीज की कार्यक्षमता बेहतर हो। अस्पताल के अनुसार, यह प्रक्रिया करीब एक घंटे की होती है। धातु के फ्रेम की जगह विशेष मेश मास्क का उपयोग किया जाएगा। आमतौर पर बेहोशी की जरूरत नहीं होती और मरीज उसी दिन घर जा सकता है। यह रिसर्च बीमारी के इलाज में एक नई उम्मीद जगा रही है।
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