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Delhi NCR News: एक साल बाद भी नई ईवी पॉलिसी नहीं, एक्सटेंशन के सहारे चल रही दिल्ली की इलेक्ट्रिक योजना
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में नई सरकार को आए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पॉलिसी 2.0 अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है। 2023 में समाप्त हो चुकी पुरानी नीति आज भी लगातार एक्सटेंशन के सहारे चल रही है। ताजा फैसले में इसे फिर तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है, जिससे सरकार की नीति निर्माण क्षमता और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अगस्त 2020 में लागू की गई दिल्ली की ईवी पॉलिसी को देश की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में गिना गया था। इसका मकसद प्रदूषण कम करना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना था। लेकिन अगस्त 2023 में इसकी अवधि समाप्त होने के बाद नई नीति समय पर नहीं लाई जा सकी। तब से अब तक यह पॉलिसी बार-बार अस्थायी विस्तार पर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नई सरकार को एक साल से अधिक समय मिल चुका है, तो ईवी पॉलिसी 2.0 अब तक अधिसूचित क्यों नहीं हो पाई। सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि नई नीति का ड्राफ्ट अंतिम चरण में है और इसे जल्द लागू किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, 2026 से 2030 तक की अवधि के लिए तैयार की जा रही ईवी पॉलिसी 2.0 में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने पर विशेष जोर होगा। योजना के तहत इस साल 7,000 नए चार्जिंग पॉइंट और 100 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कुल संख्या 16,000 से अधिक हो जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिना नई नीति के पूरा ईवी सेक्टर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। ऑटो कंपनियां, निवेशक और उपभोक्ता सभी यह जानना चाहते हैं कि आगे की दिशा क्या होगी, सब्सिडी क्या मिलेगी, नियम क्या होंगे और सरकार की प्राथमिकताएं क्या रहेंगी। फिलहाल, राजधानी की ईवी नीति एक्सटेंशन मॉडल पर चल रही है,जहां हर कुछ महीनों में समय बढ़ा दिया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान सामने नहीं आता। अब नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आखिर कब तक नई नीति को जमीन पर उतारती है, या फिर यह अस्थायी व्यवस्था ही आगे भी जारी रहती है।
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नई दिल्ली। राजधानी में नई सरकार को आए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पॉलिसी 2.0 अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है। 2023 में समाप्त हो चुकी पुरानी नीति आज भी लगातार एक्सटेंशन के सहारे चल रही है। ताजा फैसले में इसे फिर तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है, जिससे सरकार की नीति निर्माण क्षमता और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अगस्त 2020 में लागू की गई दिल्ली की ईवी पॉलिसी को देश की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में गिना गया था। इसका मकसद प्रदूषण कम करना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना था। लेकिन अगस्त 2023 में इसकी अवधि समाप्त होने के बाद नई नीति समय पर नहीं लाई जा सकी। तब से अब तक यह पॉलिसी बार-बार अस्थायी विस्तार पर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नई सरकार को एक साल से अधिक समय मिल चुका है, तो ईवी पॉलिसी 2.0 अब तक अधिसूचित क्यों नहीं हो पाई। सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि नई नीति का ड्राफ्ट अंतिम चरण में है और इसे जल्द लागू किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, 2026 से 2030 तक की अवधि के लिए तैयार की जा रही ईवी पॉलिसी 2.0 में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने पर विशेष जोर होगा। योजना के तहत इस साल 7,000 नए चार्जिंग पॉइंट और 100 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कुल संख्या 16,000 से अधिक हो जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिना नई नीति के पूरा ईवी सेक्टर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। ऑटो कंपनियां, निवेशक और उपभोक्ता सभी यह जानना चाहते हैं कि आगे की दिशा क्या होगी, सब्सिडी क्या मिलेगी, नियम क्या होंगे और सरकार की प्राथमिकताएं क्या रहेंगी। फिलहाल, राजधानी की ईवी नीति एक्सटेंशन मॉडल पर चल रही है,जहां हर कुछ महीनों में समय बढ़ा दिया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान सामने नहीं आता। अब नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आखिर कब तक नई नीति को जमीन पर उतारती है, या फिर यह अस्थायी व्यवस्था ही आगे भी जारी रहती है।
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