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Delhi NCR News: निमोनिया के उपचार के लिए एआई से खोजी जाएगी दवा
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-आईआईआईटी दिल्ली और स्वीडन के शोधकर्ता मिलकर करेंगे शोध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) दिल्ली निमोनिया की बीमारी के उपचार के लिए एआई की मदद से दवा की खोज करेगा। इसको लेकर आईआईआईटी दिल्ली को जैव प्रौद्योगिकी विभाग-विनोवा सहयोगात्मक कार्यक्रम के तहत भारत-स्वीडन संयुक्त कार्यक्रम के लिए शोध अनुदान की मंजूरी मिली है। इसके तहत निमोनिया पैदा करने वाले रोगजनकों के खिलाफ एआई आधारित पेप्टाइड चिकित्सीय दवाओं को विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए भारत की ओर से लगभग 52.2 लाख और स्वीडन की ओर से 28 लाख का वित्तीय सहयोग मंजूर हुआ है। इस शोध परियोजना का नेतृत्व आईआईआईटी दिल्ली के दिल्ली के कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी विभाग के डॉ. डोसेंट एन. अरुल मुरुगन करेंगे। जबकि प्रो. जी.पी.एस. राघव और डॉ. विभोर कुमार सह प्रधान अन्वेषक के रूप में शामिल हैं। डॉ. डोसेंट एन. अरुल मुरुगन ने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई जैव-चिकित्सा खोज को तेजी से बदल देगी।
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नई दिल्ली।
इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) दिल्ली निमोनिया की बीमारी के उपचार के लिए एआई की मदद से दवा की खोज करेगा। इसको लेकर आईआईआईटी दिल्ली को जैव प्रौद्योगिकी विभाग-विनोवा सहयोगात्मक कार्यक्रम के तहत भारत-स्वीडन संयुक्त कार्यक्रम के लिए शोध अनुदान की मंजूरी मिली है। इसके तहत निमोनिया पैदा करने वाले रोगजनकों के खिलाफ एआई आधारित पेप्टाइड चिकित्सीय दवाओं को विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए भारत की ओर से लगभग 52.2 लाख और स्वीडन की ओर से 28 लाख का वित्तीय सहयोग मंजूर हुआ है। इस शोध परियोजना का नेतृत्व आईआईआईटी दिल्ली के दिल्ली के कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी विभाग के डॉ. डोसेंट एन. अरुल मुरुगन करेंगे। जबकि प्रो. जी.पी.एस. राघव और डॉ. विभोर कुमार सह प्रधान अन्वेषक के रूप में शामिल हैं। डॉ. डोसेंट एन. अरुल मुरुगन ने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई जैव-चिकित्सा खोज को तेजी से बदल देगी।