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कथित आबकारी घोटला: सीबीआई की याचिका पर जवाब के लिए केजरीवाल को दो सप्ताह का अतिरिक्त समय
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, उनके पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तथा 21 अन्य आरोपियों को केंद्रीय जांच ब्यूरो की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया। सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को दिल्ली आबकारी नीति मामले में डिस्चार्ज कर दिया गया था। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा की एकल पीठ ने मामले को 6 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत ने आरोपियों को जवाब दाखिल करने का समय दिया, जबकि सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिक समय देने का विरोध किया और कहा कि निचली अदालत का आदेश सही नहीं है इसे एक सेकंड से ज्यादा रिकॉर्ड पर नहीं रहना चाहिए।
केजरीवाल केवल आरोप लगाकर भाग जाते हैं
सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होने के कारण आरोपियों से जवाब की जरूरत नहीं है और उन्हें एक सप्ताह से ज्यादा समय नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में आरोप लगाकर भागने का पैटर्न चल रहा है और ऐसे वादियों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए, जिन्होंने आरोपों से करियर बनाया है।
सुप्रीम कोर्ट में दी है चुनौती : हरिहरन
केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहले ही चुनौती दे चुके हैं। न्यायमूर्ति ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई स्टे नहीं मिला जब तक सुप्रीम कोर्ट से कार्यवाही पर रोक का आदेश नहीं मिलता, तब तक मामला चलता रहेगा। मेहता ने कहा कि यदि स्टे के आधार पर स्थगन मांगा जा रहा है, तो एसएलपी को इस सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए, इसे लंबित नहीं रखा जा सकता।
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केजरीवाल केवल आरोप लगाकर भाग जाते हैं
सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होने के कारण आरोपियों से जवाब की जरूरत नहीं है और उन्हें एक सप्ताह से ज्यादा समय नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में आरोप लगाकर भागने का पैटर्न चल रहा है और ऐसे वादियों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए, जिन्होंने आरोपों से करियर बनाया है।
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सुप्रीम कोर्ट में दी है चुनौती : हरिहरन
केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहले ही चुनौती दे चुके हैं। न्यायमूर्ति ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई स्टे नहीं मिला जब तक सुप्रीम कोर्ट से कार्यवाही पर रोक का आदेश नहीं मिलता, तब तक मामला चलता रहेगा। मेहता ने कहा कि यदि स्टे के आधार पर स्थगन मांगा जा रहा है, तो एसएलपी को इस सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए, इसे लंबित नहीं रखा जा सकता।