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गर्भावस्था में एआरडीएस बना बड़ा खतर: हर दो में से एक महिला की मौत, शोध में चौंकने वाले तथ्य आए सामने

सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Mon, 06 Apr 2026 07:46 AM IST
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सार

जामिया हमदर्द की शोधकर्ता जेबा खानम और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज व सफदरजंग अस्पताल की ज्योत्सना सूरी ने यह अध्ययन मिलकर किया। 2016 से 2021 के बीच उन महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जो गर्भावस्था के 28 सप्ताह से लेकर प्रसव के बाद 6 सप्ताह के अंदर एआरडीएस से पीड़ित थीं।

ARDS Emerges as a Major Threat During Pregnancy, One in Two Women Dies
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली गंभीर बीमारी एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) से पीड़ित महिलाओं में मृत्यु दर बेहद अधिक पाई गई है। जामिया हमदर्द और वीएमएमसी-सफदरजंग अस्पताल के संयुक्त अध्ययन में खुलासा हुआ कि इस बीमारी से ग्रसित करीब 49.2% महिलाओं की मौत हो गई। यानी हर दो गर्भवती में से एक की मौत हो जा रही है। इस बीमारी से ग्रसित महिलाओं के फेफड़े हवा के बजाय तरल से भर जाते हैं। 

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जामिया हमदर्द की शोधकर्ता जेबा खानम और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज व सफदरजंग अस्पताल की ज्योत्सना सूरी ने यह अध्ययन मिलकर किया। 2016 से 2021 के बीच उन महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जो गर्भावस्था के 28 सप्ताह से लेकर प्रसव के बाद 6 सप्ताह के अंदर एआरडीएस से पीड़ित थीं। शोध में कुल 132 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें से 102 मरीजों ने बर्लिन एआरडीएस मानदंड के मानकों को पूरा किया। ये मानदंड फेफड़े की चोट की तीव्रता को मापने के लिए उपयोग किए जाते हैं। शोध में यह भी पाया गया कि जिन मरीजों में एआरडीएस की स्थिति गंभीर थी, उनमें मौत का खतरा सबसे ज्यादा था। खून में लैक्टेट का स्तर दो मोल प्रति लीटर से अधिक जिन महिलाओं में था, उनमें भी मृत्यु का जोखिम काफी बढ़ गया। 
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डॉक्टरों के अनुसार, यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी और गंभीर स्थिति का संकेत होता है। शोधकर्ता जेबा खानम ने बताया कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत उपचार शुरू किया जाए, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। 

गंभीर एआरडीएस वाले मरीजों में मौत का खतरा 10 गुना अधिक
अध्ययन के अनुसार, गंभीर एआरडीएस वाले मरीजों में मौत का खतरा करीब 10 गुना तक बढ़ जाता है, जबकि अधिक लैक्टेट स्तर वाले मरीजों में यह खतरा लगभग चार गुना ज्यादा होता है। इसके अलावा, जिन महिलाओं का समय पर प्रसव नहीं हुआ या जिन्हें इलाज के दौरान वैसोप्रेसर दवाएं देनी पड़ीं, उनमें भी मृत्यु का जोखिम अधिक पाया गया। शोध में यह भी सामने आया कि शरीर के अंगों की कार्यक्षमता में कमी भी एक बड़ा कारण है, जो स्थिति को और गंभीर बना देता है। ऐसे मामलों में मरीजों की लगातार निगरानी और तुरंत इलाज बेहद जरूरी हो जाता है।

एआरडीएस? 
एआरडीएस फेफड़ों की एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें फेफड़ों की छोटी हवा की थैलियों में तरल पदार्थ भर जाता है, जिससे रक्त में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता है। यह आमतौर पर निमोनिया, सेप्सिस (रक्त संक्रमण) या गंभीर चोट के 24-48 घंटों के भीतर विकसित होती है।

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