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Delhi NCR News: विपक्ष की भूमिका पर विधानसभा अध्यक्ष ने उठाए सवाल
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कहा- पूरे सत्र में नेता प्रतिपक्ष आतिशी सदन से रहीं गैरहाजिर, हंगामे के बजाय जनहित के मुद्दे उठाने चाहिए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के विपक्ष की भूमिका पर तीखा हमला बोला है। आठवीं विधानसभा के छठे सत्र के सत्रावसान के बाद बुधवार को उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि पूरे सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी सदन में नहीं आईं। यहां तक कि सत्रावसान के समय भी नेता प्रतिपक्ष का नाम सदन में मौजूद सदस्यों में नहीं था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद विधानसभा ने बिना समय गंवाए चार विधेयक पारित किए और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा की।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका सरकार को जवाबदेह बनाना है, लेकिन इस सत्र में विपक्ष की ओर से कोई सार्थक जनहित का मुद्दा नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्यों की ओर से अराजकता दिखाई गई। सदन में चावल फेंकने, आपत्तिजनक इशारे करने और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल जैसी घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मतदाताओं के दबाव में विपक्ष के कुछ सदस्य सदन में पहुंचे, लेकिन नेता विपक्ष की गैरमौजूदगी चिंताजनक है।
तीन दिन में चार विधेयक पारित
अध्यक्ष के मुताबिक आठवीं विधानसभा का छठा सत्र तीन दिन चला और कुल 13 घंटे 19 मिनट कार्यवाही हुई। इस दौरान एजेंडे में शामिल सभी विषयों पर चर्चा हुई और चार विधेयक पारित किए गए। उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद सदन ने अपना काम बिना समय गंवाए पूरा किया।
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छह सत्रों में 19 सीएजी रिपोर्ट
विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा की निगरानी भूमिका को भी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधानसभा के छह सत्रों में 19 सीएजी रिपोर्ट सदन में रखी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, पिछली सरकार के 10 साल के कार्यकाल में एक भी सीएजी रिपोर्ट सदन में नहीं रखी गई थी। पहली बार विधानसभा प्रशासन के कामकाज पर सूक्ष्म स्तर पर नजर रख रही है। सभी सीएजी रिपोर्ट पर संबंधित विभागों को कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
सदस्यों को जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर
अध्यक्ष ने बताया कि तीन दिन में नियम 280 के तहत 52 मामले उठाए गए। उन्होंने कहा कि नियमानुसार प्रतिदिन करीब 10 मुद्दे उठाए जा सकते हैं, लेकिन सदस्यों को अधिक से अधिक जनहित के मामले रखने का अवसर दिया गया। उनके मुताबिक सदन में सदस्यों की उपस्थिति भी अच्छी रही और सत्तापक्ष के 48 में से करीब 44-45 सदस्य सदन में पहुंचे।
डेढ़ साल में छह सत्र, विपक्ष पर नरमी
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सातवीं विधानसभा पांच सत्र भी पूरे नहीं कर पाई थी, जबकि मौजूदा विधानसभा ने करीब डेढ़ साल में छह सत्र पूरे कर लिए हैं। विपक्ष के हंगामे पर कार्रवाई का अधिकार होने के बावजूद उन्होंने नरमी बरती, ताकि विपक्ष को आगे संसदीय परंपराओं का पालन करने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।
अग्निशमन विधेयक से सेवा होगी मजबूत
अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली अग्निशमन सेवा विधेयक के पारित होने से अग्निशमन सेवाओं को मजबूती मिलेगी। विधानसभा केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों के कामकाज की निगरानी भी कर रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्य में लोक लेखा समिति (पीएसी) से भी पूरा सहयोग मिल रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के विपक्ष की भूमिका पर तीखा हमला बोला है। आठवीं विधानसभा के छठे सत्र के सत्रावसान के बाद बुधवार को उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि पूरे सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी सदन में नहीं आईं। यहां तक कि सत्रावसान के समय भी नेता प्रतिपक्ष का नाम सदन में मौजूद सदस्यों में नहीं था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद विधानसभा ने बिना समय गंवाए चार विधेयक पारित किए और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा की।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका सरकार को जवाबदेह बनाना है, लेकिन इस सत्र में विपक्ष की ओर से कोई सार्थक जनहित का मुद्दा नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्यों की ओर से अराजकता दिखाई गई। सदन में चावल फेंकने, आपत्तिजनक इशारे करने और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल जैसी घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मतदाताओं के दबाव में विपक्ष के कुछ सदस्य सदन में पहुंचे, लेकिन नेता विपक्ष की गैरमौजूदगी चिंताजनक है।
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तीन दिन में चार विधेयक पारित
अध्यक्ष के मुताबिक आठवीं विधानसभा का छठा सत्र तीन दिन चला और कुल 13 घंटे 19 मिनट कार्यवाही हुई। इस दौरान एजेंडे में शामिल सभी विषयों पर चर्चा हुई और चार विधेयक पारित किए गए। उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद सदन ने अपना काम बिना समय गंवाए पूरा किया।
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छह सत्रों में 19 सीएजी रिपोर्ट
विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा की निगरानी भूमिका को भी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधानसभा के छह सत्रों में 19 सीएजी रिपोर्ट सदन में रखी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, पिछली सरकार के 10 साल के कार्यकाल में एक भी सीएजी रिपोर्ट सदन में नहीं रखी गई थी। पहली बार विधानसभा प्रशासन के कामकाज पर सूक्ष्म स्तर पर नजर रख रही है। सभी सीएजी रिपोर्ट पर संबंधित विभागों को कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
सदस्यों को जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर
अध्यक्ष ने बताया कि तीन दिन में नियम 280 के तहत 52 मामले उठाए गए। उन्होंने कहा कि नियमानुसार प्रतिदिन करीब 10 मुद्दे उठाए जा सकते हैं, लेकिन सदस्यों को अधिक से अधिक जनहित के मामले रखने का अवसर दिया गया। उनके मुताबिक सदन में सदस्यों की उपस्थिति भी अच्छी रही और सत्तापक्ष के 48 में से करीब 44-45 सदस्य सदन में पहुंचे।
डेढ़ साल में छह सत्र, विपक्ष पर नरमी
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सातवीं विधानसभा पांच सत्र भी पूरे नहीं कर पाई थी, जबकि मौजूदा विधानसभा ने करीब डेढ़ साल में छह सत्र पूरे कर लिए हैं। विपक्ष के हंगामे पर कार्रवाई का अधिकार होने के बावजूद उन्होंने नरमी बरती, ताकि विपक्ष को आगे संसदीय परंपराओं का पालन करने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।
अग्निशमन विधेयक से सेवा होगी मजबूत
अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली अग्निशमन सेवा विधेयक के पारित होने से अग्निशमन सेवाओं को मजबूती मिलेगी। विधानसभा केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों के कामकाज की निगरानी भी कर रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्य में लोक लेखा समिति (पीएसी) से भी पूरा सहयोग मिल रहा है।