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Delhi NCR News: एक पैर पर बैडमिंटन, आंखों पर पट्टी और व्हीलचेयर क्रिकेट... दिल्ली में बच्चों ने महसूस किया पैरा एथलीटों का संघर्ष
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भारत-फ्रांस का अनूठा प्रयास: पैरा स्पोर्ट्स के जरिये बच्चों को सिखाया जाएगा समावेशी सोच का पाठ
दिल्ली में पैरा एलान कार्यक्रम शुरू, 300 छात्रों ने दिव्यांग खिलाड़ियों से सीखा संघर्ष
सनी सिंह
नई दिल्ली। दिल्ली के त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को भारत-फ्रांस की संयुक्त पहल पैरा एलान का पहला कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली के सरकारी और निजी स्कूलों के 300 छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगता को दया नहीं, बल्कि क्षमता, आत्मविश्वास और समान अवसर के नजरिए से देखने की सोच विकसित करना था।
यह अभियान फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया, भारत स्थित फ्रांस दूतावास और पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) की साझेदारी से शुरू हुआ है। कार्यक्रम में बच्चों ने व्हीलचेयर क्रिकेट, व्हीलचेयर टेबल टेनिस, वन-लेग्ड बैडमिंटन और ब्लाइंड गोलपोस्ट जैसे खेलों में हिस्सा लिया। इन खेलों के जरिये छात्रों को पैरा खिलाड़ियों की रोजमर्रा की चुनौतियों का अनुभव हुआ।
कई छात्र संतुलन बनाने में संघर्ष करते दिखे, वहीं आंखों पर पट्टी बांधकर खेलते समय उन्हें दूसरों पर भरोसा करने का महत्व समझ आया। यह अनुभव कार्यक्रम का मुख्य संदेश बनकर सामने आया। पैरालंपिक पदक विजेता शरद कुमार और विश्व रिकॉर्डधारी पैरा ओपन वॉटर तैराक शम्स आलम सहित कई राष्ट्रीय पैरा खिलाड़ियों ने बच्चों से संवाद किया। खिलाड़ियों ने बताया कि सीमाएं शरीर में नहीं, बल्कि सोच में होती हैं। उन्होंने कहा कि लगातार अभ्यास, आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
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खेल से संवेदनशीलता का विकास
कार्यक्रम में छात्रों ने व्हीलचेयर क्रिकेट और ब्लाइंड गोलपोस्ट जैसे खेलों में भाग लिया। इन खेलों ने उन्हें पैरा खिलाड़ियों की चुनौतियों को महसूस कराया। बच्चों ने समझा कि कैसे ये खिलाड़ी कठिनाइयों के बावजूद देश का नाम रोशन करते हैं। खेल के दौरान उन्हें धैर्य और दूसरों पर भरोसा करने का महत्व भी समझ आया।
समानता और समावेश का मंच
इस कार्यक्रम में दिल्ली के छह सीएम श्री स्कूलों और चार निजी स्कूलों के छात्रों ने एक साथ भाग लिया। आयोजकों का मानना है कि यह पहल विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों को एक मंच पर लाई है। इससे समानता और समावेश की भावना को मजबूत किया जा सकता है। इस अभियान का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में देशभर के 10 हजार से अधिक छात्रों को जोड़ना है।
क्या बोले -
-पैरा एलान भारत और फ्रांस की उस साझा सोच का प्रतीक है, जिसमें शिक्षा और खेल के जरिये समावेशी समाज बनाने पर जोर दिया गया है। जब बच्चे पैरा स्पोर्ट्स को खुद अनुभव करते हैं तो वे समझते हैं कि समावेश केवल एक विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाने वाली संस्कृति है।
थियरी माथू, भारत में फ्रांस के राजदूत
-हम बच्चों को सिर्फ पैरा स्पोर्ट्स से परिचित नहीं करा रहे, बल्कि उनकी सोच बदलने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि साहस, प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के रूप में देखे।
-डॉ. पायल बंसल कनोडिया, अध्यक्ष, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया
-अगर बच्चे आज हमारे संघर्ष को महसूस कर पाए हैं, तो यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है। सम्मान और संवेदनशीलता की शुरुआत अनुभव से होती है।
शरद कुमार, पैरालंपिक पदक विजेता
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दिल्ली में पैरा एलान कार्यक्रम शुरू, 300 छात्रों ने दिव्यांग खिलाड़ियों से सीखा संघर्ष
सनी सिंह
नई दिल्ली। दिल्ली के त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को भारत-फ्रांस की संयुक्त पहल पैरा एलान का पहला कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली के सरकारी और निजी स्कूलों के 300 छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगता को दया नहीं, बल्कि क्षमता, आत्मविश्वास और समान अवसर के नजरिए से देखने की सोच विकसित करना था।
यह अभियान फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया, भारत स्थित फ्रांस दूतावास और पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) की साझेदारी से शुरू हुआ है। कार्यक्रम में बच्चों ने व्हीलचेयर क्रिकेट, व्हीलचेयर टेबल टेनिस, वन-लेग्ड बैडमिंटन और ब्लाइंड गोलपोस्ट जैसे खेलों में हिस्सा लिया। इन खेलों के जरिये छात्रों को पैरा खिलाड़ियों की रोजमर्रा की चुनौतियों का अनुभव हुआ।
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कई छात्र संतुलन बनाने में संघर्ष करते दिखे, वहीं आंखों पर पट्टी बांधकर खेलते समय उन्हें दूसरों पर भरोसा करने का महत्व समझ आया। यह अनुभव कार्यक्रम का मुख्य संदेश बनकर सामने आया। पैरालंपिक पदक विजेता शरद कुमार और विश्व रिकॉर्डधारी पैरा ओपन वॉटर तैराक शम्स आलम सहित कई राष्ट्रीय पैरा खिलाड़ियों ने बच्चों से संवाद किया। खिलाड़ियों ने बताया कि सीमाएं शरीर में नहीं, बल्कि सोच में होती हैं। उन्होंने कहा कि लगातार अभ्यास, आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
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खेल से संवेदनशीलता का विकास
कार्यक्रम में छात्रों ने व्हीलचेयर क्रिकेट और ब्लाइंड गोलपोस्ट जैसे खेलों में भाग लिया। इन खेलों ने उन्हें पैरा खिलाड़ियों की चुनौतियों को महसूस कराया। बच्चों ने समझा कि कैसे ये खिलाड़ी कठिनाइयों के बावजूद देश का नाम रोशन करते हैं। खेल के दौरान उन्हें धैर्य और दूसरों पर भरोसा करने का महत्व भी समझ आया।
समानता और समावेश का मंच
इस कार्यक्रम में दिल्ली के छह सीएम श्री स्कूलों और चार निजी स्कूलों के छात्रों ने एक साथ भाग लिया। आयोजकों का मानना है कि यह पहल विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों को एक मंच पर लाई है। इससे समानता और समावेश की भावना को मजबूत किया जा सकता है। इस अभियान का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में देशभर के 10 हजार से अधिक छात्रों को जोड़ना है।
क्या बोले -
-पैरा एलान भारत और फ्रांस की उस साझा सोच का प्रतीक है, जिसमें शिक्षा और खेल के जरिये समावेशी समाज बनाने पर जोर दिया गया है। जब बच्चे पैरा स्पोर्ट्स को खुद अनुभव करते हैं तो वे समझते हैं कि समावेश केवल एक विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाने वाली संस्कृति है।
थियरी माथू, भारत में फ्रांस के राजदूत
-हम बच्चों को सिर्फ पैरा स्पोर्ट्स से परिचित नहीं करा रहे, बल्कि उनकी सोच बदलने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि साहस, प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के रूप में देखे।
-डॉ. पायल बंसल कनोडिया, अध्यक्ष, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया
-अगर बच्चे आज हमारे संघर्ष को महसूस कर पाए हैं, तो यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है। सम्मान और संवेदनशीलता की शुरुआत अनुभव से होती है।
शरद कुमार, पैरालंपिक पदक विजेता