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Delhi NCR News: विजिलेंस को देख रिश्वतखोर मंडी सुपरवाइजर पहले तल से कूदा, गिरफ्तार, सचिव भागा
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लाइसेंस के नाम पर रिश्वतखोरी का हुआ खुलासा
पीड़ित ने आरोप लगाया था कि उससे 20 हजार रुपये मांगे गए हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। विजिलेंस टीम ने बुधवार को लाइसेंस बनाने के एवज में रिश्वत मांगने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मंडी कार्यालय में छापेमारी की। इस दौरान मंडी सुपरवाइजर वेदपाल को मौके से गिरफ्तार किया गया, जबकि सचिव मनोज कुमार टीम को देखकर भाग गया। यह कार्रवाई जैद पुत्र जुम्मे खान निवासी सालाहेड़ी की शिकायत पर हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि लाइसेंस जारी करने के बदले उससे 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में सचिव के कहने पर 15,600 रुपये मंडी सुपरवाइजर वेदपाल को दिए गए। विजिलेंस टीम के पहुंचते ही कार्यालय में हड़कंप मच गया। वेदपाल ने भी भागने की कोशिश की और फर्स्ट फ्लोर से कूद गया, लेकिन टीम के सदस्यों ने तत्परता दिखाते हुए उसे दबोच लिया। हालांकि, अब तक रिश्वत की रकम बरामद नहीं हो पाई है। इस कार्रवाई के दौरान ड्यूटी मैजिस्ट्रेट अमित कुमार ने टीम का नेतृत्व किया।
मामले में सचिव मनोज कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी में बिना पैसे कोई काम नहीं होता था। एक महिला सफाई कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसकी 7 हजार रुपये की मासिक तनख्वाह में से 2-3 हजार रुपये सचिव द्वारा काट लिए जाते थे। इसके अलावा गेट पास जारी करने में धांधली, आढ़तियों से अवैध वसूली और मजदूरों के हक का पैसा न देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। यहां तक कि सचिव पर मजदूरों के खाने-पीने का सामान भी बिना भुगतान के लेने के आरोप लगे हैं। गौरतलब है कि मंडी सुपरवाइजर वेदपाल पहले भी भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल जा चुका है और हाल ही में जमानत पर बाहर आया था। अब एक बार फिर रिश्वत लेते पकड़े जाने से उसकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। फरार सचिव मनोज कुमार की तलाश जारी है और विजिलेंस टीम पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
गाड़ी की तलाशी ली:
सचिव अपनी गाड़ी छोड़कर मौके से भाग गया, लेकिन एसीबी की टीम ने गाड़ी का लॉक तोड़कर उसकी तलाशी भी ली, लेकिन रकम की बरामदगी नहीं हो पाई। जिसके बाद गाड़ी को भी कब्जे में ले लिया गया।
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पीड़ित ने आरोप लगाया था कि उससे 20 हजार रुपये मांगे गए हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। विजिलेंस टीम ने बुधवार को लाइसेंस बनाने के एवज में रिश्वत मांगने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मंडी कार्यालय में छापेमारी की। इस दौरान मंडी सुपरवाइजर वेदपाल को मौके से गिरफ्तार किया गया, जबकि सचिव मनोज कुमार टीम को देखकर भाग गया। यह कार्रवाई जैद पुत्र जुम्मे खान निवासी सालाहेड़ी की शिकायत पर हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि लाइसेंस जारी करने के बदले उससे 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में सचिव के कहने पर 15,600 रुपये मंडी सुपरवाइजर वेदपाल को दिए गए। विजिलेंस टीम के पहुंचते ही कार्यालय में हड़कंप मच गया। वेदपाल ने भी भागने की कोशिश की और फर्स्ट फ्लोर से कूद गया, लेकिन टीम के सदस्यों ने तत्परता दिखाते हुए उसे दबोच लिया। हालांकि, अब तक रिश्वत की रकम बरामद नहीं हो पाई है। इस कार्रवाई के दौरान ड्यूटी मैजिस्ट्रेट अमित कुमार ने टीम का नेतृत्व किया।
मामले में सचिव मनोज कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी में बिना पैसे कोई काम नहीं होता था। एक महिला सफाई कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसकी 7 हजार रुपये की मासिक तनख्वाह में से 2-3 हजार रुपये सचिव द्वारा काट लिए जाते थे। इसके अलावा गेट पास जारी करने में धांधली, आढ़तियों से अवैध वसूली और मजदूरों के हक का पैसा न देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। यहां तक कि सचिव पर मजदूरों के खाने-पीने का सामान भी बिना भुगतान के लेने के आरोप लगे हैं। गौरतलब है कि मंडी सुपरवाइजर वेदपाल पहले भी भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल जा चुका है और हाल ही में जमानत पर बाहर आया था। अब एक बार फिर रिश्वत लेते पकड़े जाने से उसकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। फरार सचिव मनोज कुमार की तलाश जारी है और विजिलेंस टीम पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
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गाड़ी की तलाशी ली:
सचिव अपनी गाड़ी छोड़कर मौके से भाग गया, लेकिन एसीबी की टीम ने गाड़ी का लॉक तोड़कर उसकी तलाशी भी ली, लेकिन रकम की बरामदगी नहीं हो पाई। जिसके बाद गाड़ी को भी कब्जे में ले लिया गया।
