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जंगल कानून में बदलाव कर अधिकारी छुपा रहे अपनी नाकामी : जीवन सिंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल।
हरियाणा वन कर्मचारी संघ के पूर्व प्रधान जीवन सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में अवैध गतिविधियों को रोकने के नाम पर कानूनों में बदलाव कर अधिकारियों की नाकामी छुपाई जा रही है। 2017 की तुलना में जुर्माने की राशि 5 से 10 गुना तक बढ़ा दी गई है। इसके बारे में न तो पंचायतों को और न ही आम लोगों को सही जानकारी दी जाती है।
जीवन सिंह ने बताया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 68 के तहत राज्य सरकार को राजपत्र में अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया। विभाग स्थायी आदेशों के आधार पर कार्य कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में कार्य योजनाओं की स्वीकृति समय पर नहीं होने के कारण लाखों घन मीटर वन संपदा नष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग में केवल 30 प्रतिशत वन रक्षक ही कार्यरत हैं, जबकि बीटों का दायरा बढ़ा दिया गया है। कर्मचारियों को वर्षों से वर्दी, यात्रा भत्ता, संचार सुविधा और हथियार तक उपलब्ध नहीं कराए गए है। जीवन सिंह ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट अधिकारी, ठेका प्रथा और राजनीतिक संरक्षण के कारण वन माफिया सक्रिय हैं। उन्होंने ईमानदार कर्मचारियों से वनों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने की अपील की।
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हरियाणा वन कर्मचारी संघ के पूर्व प्रधान जीवन सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में अवैध गतिविधियों को रोकने के नाम पर कानूनों में बदलाव कर अधिकारियों की नाकामी छुपाई जा रही है। 2017 की तुलना में जुर्माने की राशि 5 से 10 गुना तक बढ़ा दी गई है। इसके बारे में न तो पंचायतों को और न ही आम लोगों को सही जानकारी दी जाती है।
जीवन सिंह ने बताया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 68 के तहत राज्य सरकार को राजपत्र में अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया। विभाग स्थायी आदेशों के आधार पर कार्य कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में कार्य योजनाओं की स्वीकृति समय पर नहीं होने के कारण लाखों घन मीटर वन संपदा नष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग में केवल 30 प्रतिशत वन रक्षक ही कार्यरत हैं, जबकि बीटों का दायरा बढ़ा दिया गया है। कर्मचारियों को वर्षों से वर्दी, यात्रा भत्ता, संचार सुविधा और हथियार तक उपलब्ध नहीं कराए गए है। जीवन सिंह ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट अधिकारी, ठेका प्रथा और राजनीतिक संरक्षण के कारण वन माफिया सक्रिय हैं। उन्होंने ईमानदार कर्मचारियों से वनों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने की अपील की।
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