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Funds: केंद्र से दिल्ली की परियोजनाओं के लिए 1,647 करोड़ मंजूर, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा- अब तेजी से होगा काम
Mon, 13 Jul 2026 02:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:03 AM IST
सार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार मंजूर परियोजनाओं में दिल्ली मेट्रो से जुड़ी योजनाएं, बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर, करावल नगर फ्लाईओवर, डीटीसी डिपो में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और सड़क अवसंरचना के कई प्रमुख कार्य शामिल हैं।
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सीएम रेखा गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार ने राजधानी की 28 आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए 1,647 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत स्वीकृत की गई है। इसके अलावा दिल्ली सरकार को अपने संसाधनों से पूंजीगत निवेश बढ़ाने के प्रयासों के लिए 756 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया गया है।
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार मंजूर परियोजनाओं में दिल्ली मेट्रो से जुड़ी योजनाएं, बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर, करावल नगर फ्लाईओवर, डीटीसी डिपो में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और सड़क अवसंरचना के कई प्रमुख कार्य शामिल हैं। उनके अनुसार इन परियोजनाओं से राजधानी की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, सार्वजनिक परिवहन को मजबूती मिलेगी और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के पूंजीगत निवेश बढ़ाने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के प्रयासों को देखते हुए 756 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी स्वीकृत किया है। सरकार का दावा है कि यह सहायता विकास परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से लागू करने की क्षमता को भी मान्यता देती है। उन्होंने बताया कि पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के लिए ब्याजमुक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना ही नहीं, बल्कि पूंजीगत निवेश बढ़ाने और संरचनात्मक सुधारों को प्रोत्साहित करना भी है। दिल्ली सरकार लंबे समय से अपनी परियोजनाओं को इस योजना में शामिल करने की मांग कर रही थी।
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अब तेजी से बढ़ेंगी परियोजनाएं
मुख्यमंत्री के अनुसार 9 जुलाई को सभी 28 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। वित्त विभाग को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि निर्माण कार्यों में तेजी लाई जा सके। केंद्र सरकार के सहयोग पर आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे दिल्ली में आधारभूत ढांचे के विकास, पूंजीगत निवेश और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी।
अनधिकृत कॉलोनियों के लिए केंद्र से मांगे 100 करोड़
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को संपत्ति अधिकार दिलाने की प्रक्रिया तेज करने के लिए केंद्र सरकार से 100 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है। उन्होंने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि शहरी विकास कोष से पहले चरण में यह राशि उपलब्ध कराई जाए। प्रस्तावित धनराशि से डिजिटल सर्वे, जिला स्तर पर पीएम-उदय प्रकोष्ठ की स्थापना और जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि संपत्ति अधिकार देने की प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और तकनीक आधारित बन सके।
मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया है कि छह अप्रैल 2026 को अधिसूचित संशोधित पीएम-उदय विनियमों के बाद अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्ति अधिकार देने की प्रक्रिया को नया कानूनी आधार मिला है। अब मौजूदा स्थिति के आधार पर कॉलोनियों के नियमितीकरण की व्यवस्था लागू होने से लोगों के लिए संपत्ति अधिकार प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा। सरकार का कहना है कि वित्तीय सहायता मिलने पर इस व्यवस्था को तेजी से लागू किया जा सकेगा और पात्र परिवारों को निर्धारित समय में लाभ मिलेगा।
राजस्व विभाग को इस योजना का नोडल विभाग बनाया गया है। सरकार का दावा है कि आवश्यक संस्थागत ढांचा पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से जल्द मंजूरी देने की अपील करते हुए कहा कि समय पर धनराशि मिलने से लाखों परिवारों को संपत्ति अधिकार से जुड़े लाभ शीघ्र मिल सकेंगे।
हर जिले में बनेगा पीएम-उदय सहायता केंद्र
योजना के तहत दिल्ली के सभी 13 जिलों में पीएम-उदय प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएंगे। संबंधित एडीएम इनके प्रभारी होंगे। सरकार का लक्ष्य संपत्ति संबंधी दस्तावेज और प्राधिकरण पत्र 45 दिनों के भीतर जारी करना है। इस व्यवस्था पर 25 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
डिजिटल सर्वे से होगा सटीक सत्यापन
योजना का सबसे बड़ा हिस्सा डिजिटल सर्वे और मैपिंग पर खर्च होगा। इसके लिए 65 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। डीआरआईएसएचटीआई प्रणाली के माध्यम से सभी 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में भू-सर्वे, डिजिटल मैपिंग, संपत्तियों का भौतिक सत्यापन और भूमि अभिलेखों को अपडेट किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी।
जागरूकता अभियान से बढ़ेगी भागीदारी
योजना की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए 10 करोड़ रुपये के जनजागरूकता अभियान का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत आरडब्ल्यूए के साथ कार्यशालाएं, हेल्पडेस्क, सिंगल विंडो शिविर और आवेदन प्रक्रिया, पात्रता तथा समयसीमा से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक योजना का लाभ उठा सकें।
मुंगेशपुर ड्रेन होगी सुरक्षित, 11.25 करोड़ की परियोजना मंजूर
मुंगेशपुर ड्रेन के किनारे रहने वाले लोगों को जल्द ही बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मिलेंगी। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने ड्रेन के दोनों किनारों को मजबूत करने, सुरक्षा दीवार बनाने और इंस्पेक्शन पाथ विकसित करने की 11.25 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना को मंजूरी दे दी है।
परियोजना पूरी होने के बाद ड्रेन की नियमित निगरानी आसान होगी, कटाव पर प्रभावी रोक लगेगी और मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था भी अधिक सुरक्षित व सुचारु हो सकेगी। परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में काउंट नंबर 4600 मीटर से 9000 मीटर तक ड्रेन के दोनों किनारों पर सुरक्षा दीवार और इंस्पेक्शन पाथ का निर्माण होगा। इस पर करीब 9.08 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दूसरे चरण में काउंट नंबर 3350 मीटर से 4600 मीटर तक करीब 2.17 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य होगा, जिसे तीन महीने में पूरा करने की योजना है। निर्माण के दौरान ड्रेन के किनारों पर मजबूत सुरक्षा दीवार के साथ जर्सी बैरियर लगाए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। इससे बच्चों व पशुओं के ड्रेन में गिरने का खतरा घटेगा और मलबा फेंकने पर भी रोक लगेगी। इंस्पेक्शन पाथ को बिटुमिनस कंक्रीट और मैकेडम से तैयार किया जाएगा, ताकि विभागीय टीमें आसानी से निरीक्षण और रखरखाव कर सकें। ड्रेन के आसपास उगी झाड़ियों और वनस्पति की सफाई भी कराई जाएगी, जिससे जल निकासी क्षमता बनी रहे और अगले मानसून में ड्रेन पूरी क्षमता से काम कर सके।