Delhi Blast Case: धोखाधड़ी मामले में अल फलाह विवि का चेयरमैन गिरफ्तार, चार दिन दिल्ली पुलिस करेगी पूछताछ
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दिल्ली में विस्फोट के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की शिकायत पर दर्ज दो प्राथमिकी के आधार पर अल फलाह विश्वविद्यालय के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से कार्रवाई शुरू करने के बाद दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की है। अधिकारी ने बताया कि सिद्दीकी को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उसे आगे की पूछताछ के लिए चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद अपराध शाखा ने निजी विश्वविद्यालय के कामकाज से संबंधित कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी के संबंध में मामले दर्ज किए थे। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने यूजीसी की शिकायत पर 2 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थी। सिद्दीकी पर फर्जीवाड़े का आरोप था। दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े आतंकियों के तार अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े पाए गए थे। इसके बाद एनआईए समेत तमाम सुरक्षा एजेंसियों ने इस विश्वविद्यालय पर शिकंजा कसा था।
ईडी अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दिकी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस पर सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख तय की गई है। 31 जनवरी को सुनवाई के दौरान सिद्दिकी के वकीलों ने 10 हजार पन्नों की चार्जशीट पढ़ने के लिए और समय मांगा था। ईडी ने हरियाणा स्थित अल फलाह विवि की 140 करोड़ रुपये की जमीन और इमारतों को 16 जनवरी को कुर्क कर लिया था।
लाल किला के पास 10 नवंबर को बम विस्फोट के बाद यह विश्वविद्यालय सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आया था। ईडी ने अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दिकी और उनके चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया है। धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत अंतरिम आदेश जारी होने पर फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित इस विश्वविद्यालय की 54 एकड़ भूमि और उसकी इमारतों को कुर्क कर लिया गया था जिनमें विभिन्न स्कूलों और विभागों के भवन, छात्रावास आदि शामिल हैं। ईडी ने सिद्दिकी को उनके अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के आरोपों में नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था।
2018 से 2025 के बीच 415 करोड़ों की कमाई
अल फलाह समूह के खिलाफ ईडी की जांच दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की ओर से दर्ज दो प्राथमिकी पर आधारित है। आरोप है कि अल फलाह विवि ने गैरकानूनी लाभ की खातिर विद्यार्थियों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों को गुमराह करने के लिए एनएएसी मान्यता और यूजीसी मान्यता के बारे में झूठे और भ्रामक दावे किए। इससे पहले ईडी ने कहा था कि विश्वविद्यालय ने 2018 एवं 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था। उसने कहा था कि आय में यह तीव्र वृद्धि समूह के घोषित वित्तीय आंकड़ों या उसकी संपत्ति के विस्तार से मेल नहीं खाता है। एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की जांच के दौरान विश्वविद्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई। इस मामले में विश्वविद्यालय से जुड़े दो चिकित्सकों मुजम्मिल अहमद गनई और शाहीन सईद को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
मान्यता खत्म होने के बाद भी छात्रों को किया आमंत्रित
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की मान्यता 2018 में समाप्त हो गई थी, लेकिन इसने अपने आधिकारिक प्लेटफार्मों से यूजीसी की समाप्त हो चुकी मान्यता को नहीं हटाया और छात्रों को आमंत्रित करना जारी रखा। यह जानकारी विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ चल रही जांच के दौरान सामने आई।
