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Weather Woes: भीषण गर्मी से प्रभावित हुई बच्चों की पढ़ाई, 10 में से सात नहीं जा सके स्कूल, दैनिक काम प्रभावित
Thu, 09 Jul 2026 03:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 09 Jul 2026 03:20 AM IST
सार
मई और जून 2026 में भीषण गर्मी के कारण हर 10 में से करीब सात बच्चे स्कूल नहीं जा पाए या अपनी सामान्य गतिविधियां नहीं कर सके।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में बढ़ती गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। मई और जून 2026 में भीषण गर्मी के कारण हर 10 में से करीब सात बच्चे स्कूल नहीं जा पाए या अपनी सामान्य गतिविधियां नहीं कर सके।
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बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था सीआरवाई की रिपोर्ट फीलिंग द हीट: चिल्ड्रन्स वॉयस ऑन हीट, वेल-बीइंग एंड लर्निंग इन इंडिया में यह दावा किया गया है। संस्था का कहना है कि उसने 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के 10 से 17 साल की उम्र के 3,096 स्कूली बच्चों से बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, 88 प्रतिशत बच्चों ने माना कि इस साल गर्मी पिछले साल की तुलना में ज्यादा तेज थी। करीब 68 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि गर्मी के कारण उन्हें स्कूल जाने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हुई। वहीं, 76 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि तेज गर्मी के कारण पढ़ाई पर ध्यान लगाना मुश्किल हो गया।
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रिपोर्ट में बताया गया कि दोपहर का समय बच्चों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी वाला रहा। कई राज्यों में बढ़ते तापमान के कारण स्कूलों के समय में बदलाव किया गया, बाहरी गतिविधियां कम की गईं और कुछ जगहों पर कक्षाएं भी बंद करनी पड़ीं।
गर्मी के कारण बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। करीब 63 प्रतिशत बच्चों ने पानी की कमी, 51 प्रतिशत ने सिरदर्द और 44 प्रतिशत ने ज्यादा थकान की शिकायत बताई। रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी का असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर ज्यादा पड़ा। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवारों के करीब 71 प्रतिशत बच्चों ने गर्मी से जुड़ी गंभीर परेशानियां बताईं।
संस्था की सीईओ पूजा मारवाह ने कहा कि बच्चों की बातें यह बताती हैं कि बढ़ता तापमान उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और परिवार के जीवन को किस तरह प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि गर्मी से बचाव के लिए बेहतर योजनाएं और हीट एक्शन प्लान को मजबूत करने की जरूरत है।