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Delhi: यमुना में जहरीला पानी छोड़ने वाली अवैध जींस फैक्टरी पर सख्ती, 10 लाख का जुर्माना सही

Thu, 09 Jul 2026 01:24 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 09 Jul 2026 01:24 PM IST
सार

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) यमुना नदी को प्रदूषित करने वाले अवैध उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। समिति ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गढ़ी मांडू गांव में एक अवैध जींस डाइंग और वाशिंग यूनिट पर लगाए गए 10 लाख रुपये के पर्यावरण मुआवजे को सही ठहराया है। 

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Delhi Pollution Control Committee imposed environmental compensation 10 lakh rs on jeans factory
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यमुना नदी को प्रदूषित करने वाले अवैध उद्योगों के खिलाफ दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) सख्त रुख अपना रही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट में कहा है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों के खिलाफ किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। समिति ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गढ़ी मांडू गांव में चल रही एक अवैध जींस डाइंग और वाशिंग यूनिट पर लगाए गए 10 लाख रुपये के पर्यावरण मुआवजे को पूरी तरह सही और कानूनी बताया है।

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यह मामला अक्तूबर 2024 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वरुण गुलाटी की तरफ से गई एक शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत मिलने पर डीपीसीसी, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और अन्य विभागों की संयुक्त टीम ने गढ़ी मांडू गांव में छापा मारा। जांच में पाया गया कि बिना किसी अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण मंजूरी के जींस की रंगाई और धुलाई का काम किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि फैक्टरी में निकलने वाला रासायनिक और जहरीला पानी बिना किसी ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के सीधे नालों में छोड़ा जा रहा था, जो आगे चलकर यमुना नदी में मिल रहा था।
 
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डीपीसीसी ने अदालत को यह भी बताया कि जुर्माने की राशि जमा नहीं होने पर एसडीएम करावल नगर को भू-राजस्व की तरह वसूली करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इस संबंध में दोबारा रिमाइंडर भी भेजा गया है। डीपीसीसी के अनुसार, ऐसे रसायन पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसी आधार पर यूनिट को 'रेड कैटेगरी' का प्रदूषण फैलाने वाला उद्योग मानते हुए 10 लाख रुपये का पर्यावरण क्षति मुआवजा लगाया गया।

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जमीनी हकीकत यह है कि दिल्ली में करीब 500 अवैध जींस डाइंग यूनिट अब भी संचालित हो रही हैं। इनमें से अधिकांश पर न तो पर्यावरण क्षति मुआवजा लगाया गया है और न ही उन्हें सील किया गया है। रिहायशी इलाकों में भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। डीपीसीसी का कहना है कि नॉन-कन्फर्मिंग एरिया में वह कार्रवाई नहीं करेगी, जबकि इन अवैध इकाइयों से लगातार प्रदूषण फैल रहा है।-वरुण गुलाटी, पर्यावरणविद और याचिकाकर्ता

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