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Delhi NCR News: खरगे के आपत्तिजनक भाषण मामले में कोर्ट ने मांगा वीडियो लिंक
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राउज एवेन्यू कोर्ट 6 अगस्त को करेगी अगली सुनवाई, शिकायतकर्ता को संबंधित समाचार चैनलों के वीडियो प्रस्तुत करने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कथित आपत्तिजनक भाषण से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता को संबंधित भाषण का वीडियो लिंक अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील से समाचार चैनलों पर प्रसारित भाषण के वीडियो लिंक उपलब्ध कराने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं भाषण देखकर यह समझना चाहती है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का आधार क्या है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
खरगे की ओर से दाखिल जवाब में सभी आरोपों से इन्कार किया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि रिवीजन याचिका पर सुनवाई का अधिकार इस अदालत के पास नहीं है। साथ ही दलील दी गई कि भाषण किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं था, इसलिए हेट स्पीच या मानहानि का मामला नहीं बनता।
मामला अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल में चुनावी रैली के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ा है। आरएसएस से जुड़े अधिवक्ता रविंदर गुप्ता का आरोप है कि भाषण में भाजपा, आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे उनकी मानहानि हुई और नफरत फैलाने का प्रयास किया गया। इससे पहले तीस हजारी कोर्ट ने शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि भाषण राजनीतिक और वैचारिक था तथा उससे हिंसा भड़काने या सार्वजनिक शांति भंग होने का प्रथम दृष्टया कोई आधार नहीं बनता। इसी आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता ने रिवीजन याचिका दायर की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कथित आपत्तिजनक भाषण से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता को संबंधित भाषण का वीडियो लिंक अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील से समाचार चैनलों पर प्रसारित भाषण के वीडियो लिंक उपलब्ध कराने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं भाषण देखकर यह समझना चाहती है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का आधार क्या है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
खरगे की ओर से दाखिल जवाब में सभी आरोपों से इन्कार किया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि रिवीजन याचिका पर सुनवाई का अधिकार इस अदालत के पास नहीं है। साथ ही दलील दी गई कि भाषण किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं था, इसलिए हेट स्पीच या मानहानि का मामला नहीं बनता।
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मामला अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल में चुनावी रैली के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ा है। आरएसएस से जुड़े अधिवक्ता रविंदर गुप्ता का आरोप है कि भाषण में भाजपा, आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे उनकी मानहानि हुई और नफरत फैलाने का प्रयास किया गया। इससे पहले तीस हजारी कोर्ट ने शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि भाषण राजनीतिक और वैचारिक था तथा उससे हिंसा भड़काने या सार्वजनिक शांति भंग होने का प्रथम दृष्टया कोई आधार नहीं बनता। इसी आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता ने रिवीजन याचिका दायर की है।
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