फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi: AIIMS doctors warn- VIP culture is not right; there should be uniform rules for everyone in hospitals.

दिल्ली: एम्स के डॉक्टरों ने दी चेतावनी- वीआईपी कल्चर ठीक नहीं, अस्पतालों में सभी के लिए हों समान नियम

Sun, 25 Oct 2026 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 25 Oct 2026 05:48 AM IST
सार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉक्टरों ने यह चिंता जताते हुए अस्पतालों में समान नीतियां लागू करने और चिकित्सा संबंधी फैसले मरीज की जरूरत के आधार पर लेने की सिफारिश की है। 

विज्ञापन
Delhi: AIIMS doctors warn- VIP culture is not right; there should be uniform rules for everyone in hospitals.
Delhi AIIMS - फोटो : ANI

विस्तार

एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अस्पतालों में प्रभावशाली लोगों को मिलने वाले विशेष इलाज यानी 'वीआईपी कल्चर' से सामान्य मरीजों की अनदेखी हो रही है और उन्हें समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉक्टरों ने यह चिंता जताते हुए अस्पतालों में समान नीतियां लागू करने और चिकित्सा संबंधी फैसले मरीज की जरूरत के आधार पर लेने की सिफारिश की है। 

विज्ञापन


ऑन्कोलॉजी रिव्यूज जर्नल में छपे एक लेख में एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एमडी राय और उनके छात्र डॉ. हेमा सिरी कोट्टू ने अपने कैंसर सर्जरी के अनुभवों के आधार पर बताया कि जब कोई रसूखदार मरीज आता है, तो अस्पताल प्रशासन या उनके परिजनों का दबाव डॉक्टरों पर होता है। इसके चलते कई बार मरीज की सर्जरी से पहले की तैयारी किए बिना ही जल्दबाजी में ऑपरेशन कर दिया जाता है। प्रभावशाली मरीजों के लिए लंबे समय तक आईसीयू बेड रोक कर रखे जाते हैं, जिसकी वजह से उन सामान्य मरीजों को बेड नहीं मिल पाता जिन्हें इसकी ज्यादा सख्त जरूरत होती है। 
विज्ञापन


58 वर्षीय महिला की बिना तैयारी के हुई सर्जरी, फेफड़ों में आई समस्या  
लेख में उदाहरण देकर पूरी सि्थति को बेहतर तरीके से बताया गया है। इसमें पहला मामला 58 वर्षीय महिला का है, जो डिम्बग्रंथि कैंसर से जूझ रही थी। अस्पताल प्रबंधन के दबाव में बिना पूरी तैयारी के उसकी सर्जरी की गई और लंबे समय तक आईसीयू में रखा गया। समय पर मूवमेंट न होने से फेफड़ों में दिक्कतें आईं और अस्पताल में रुकने का समय 5 दिन से बढ़कर 12 दिन हो गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉक्टरों के सुझाव और समाधान
डॉ. राय ने स्पष्ट किया कि मरीज का सवाल पूछना या दूसरी राय लेना उनका अधिकार है, लेकिन जरूरी मेडिकल नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का दबाव बनाना गलत है। इससे निपटने के लिए डॉक्टरों ने कुछ सुझाव भी दिए हैं, जिसके मुताबिक अस्पतालों में भर्ती होने के कड़े नियम होने चाहिए। अस्पताल से छुट्टी करने की नीतियां बिल्कुल साफ और समान होनी चाहिए। स्वास्थ्य संसाधनों का आवंटन सामाजिक स्थिति या रसूख के बजाय केवल मरीज की मेडिकल जरूरत के आधार पर होना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed