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हवा में जहर: प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई सुस्त, कहीं घंटों जाम में फंसे वाहन तो कहीं धूल उड़ाते निर्माण स्थल

Sun, 25 Oct 2026 05:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा ज्योति सिंह, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 25 Oct 2026 05:53 AM IST
सार

दिल्ली में प्रदूषण के स्रोतों की पड़ताल के दौरान अलग-अलग इलाकों में ऐसी ही स्थितियां सामने आईं। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बनाए गए नियम जमीन पर कितने प्रभावी हैं और उनकी निगरानी कितनी सख्त है, इसी की पड़ताल की गई। 

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Poison in the air: Action against pollution is sluggish
Delhi Air Pollution - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के कई कारण हैं। कहीं फ्लाईओवर पर वाहनों की कतारें हैं, कहीं निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के इंतजाम कम है, तो कहीं टूटी सड़कों पर जमा मिट्टी और मलबा से धूल हवा में घुल रहा है। दिल्ली में प्रदूषण के स्रोतों की पड़ताल के दौरान अलग-अलग इलाकों में ऐसी ही स्थितियां सामने आईं। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बनाए गए नियम जमीन पर कितने प्रभावी हैं और उनकी निगरानी कितनी सख्त है, इसी की पड़ताल की गई। 

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कहीं निर्माण, कहीं धूल और मलबा : मथुरा रोड से जसोला अपोलो जाने वाले मार्ग पर दो सीएनजी पंपों के निर्माण का काम जारी है। इसके चारों ओर किसी तरह का घेराव नहीं था। वहीं, मथुरा रोड पर कई जगह निर्माण कार्य होता दिखाई दिया। शादीपुर से करोल बाग तक कुछ ही किलोमीटर के रास्ते में 8 से अधिक निर्माण स्थल मिले। इनमें कुछ जगहों पर निर्माण संबंधी नियमों की अनदेखी नजर आई। निर्माण कार्य के दौरान कई स्थल पर घेराबंदी थी, लेकिन उसके अंदर बिना ढके हुए रेत का ढेर भी नजर आ रहा था। ओखला अंडरपास के पास टूटी सड़क पर मिट्टी और मलबा जमा मिला। वाहनों की आवाजाही से इस जगह भारी धूल उड़ती दिखी। 
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कालिंदी कुंज और ओखला बैराज के पास यमुना नदी की सतह पर एक बार फिर से जहरीले सफेद झाग की मोटी परत दिखाई दी है। इसके अलावा नदी के तट पर कूड़े के ढेर दिखे। पानी में झाग के साथ-साथ काई और कूड़ा भी तैरता दिखा।
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21 केंद्रों पर एक्यूआई खराब, नरेला में सबसे प्रदूषित हवा
दिल्ली में प्रदूषण का असर कई इलाकों में दिख रहा है। आज केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सुबह 8 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 190 दर्ज किया। इस तरह बीते दिन राजधानी की हवा मध्यम श्रेणी में पहुंच गई। शुक्रवार सुबह सात बजे एक्यूआई 223 था, जो खराब श्रेणी में दर्ज किया गया था। इस तरह एक दिन में सूचकांक में 33 अंकों का सुधार हुआ। 

शहर के कई इलाकों में हवा अब भी खराब श्रेणी में बनी हुई है। 21 प्रदूषण निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई खराब श्रेणी में नजर आया। नरेला में सबसे अधिक 293 एक्यूआई रहा, जबकि जहांगीरपुरी में 285 और मुंडका में 277 दर्ज किया गया। इसके उलट घुम्मनहेड़ा में एक्यूआई 97 रहा, जहां हवा संतोषजनक श्रेणी में दर्ज हुई। आंकड़ों के अनुसार, अलीपुर में एक्यूआई 264, विवेक विहार में 261, डीटीयू में 255, सोनिया विहार में 252 और बवाना में 247 रहा। रोहिणी में 244, चांदनी चौक में 245, पूसा में 243 और आरके पुरम में 240 एक्यूआई दर्ज किया गया। इन इलाकों में हवा खराब श्रेणी में बनी हुई है। 

पत्तों को समेटने निकली एनडीएमसी की गाड़ी, रास्ते में बिखेरती गई कचरा 
एनडीएमसी की कूड़ा उठाने वाली एक गाड़ी में सूखे पत्ते भरे थे, लेकिन उन्हें ढककर ले जाने के बजाय खुले में ले जाया जा रहा था। नतीजा यह था कि रास्ते में पत्ते नीचे गिरते रहे। शहर में धूल और प्रदूषण कम करने के लिए सफाई पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में कचरा उठाने वाली गाड़ी से ही सड़क पर कचरा बिखरने लगे, तो सफाई व्यवस्था के तौर-तरीकों पर सवाल उठना लाजिमी है।

कई इलाकों में पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक 
निगरानी केंद्रों के आंकड़ों में कई इलाकों में पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा। अलीपुर, बवाना, डीटीयू, नरेला, सोनिया विहार और विवेक विहार सहित कई केंद्रों पर पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया। वहीं, जहांगीरपुरी, मुंडका, चांदनी चौक और मथुरा रोड स्थित सीआरआरआई केंद्र पर पीएम 10 प्रमुख प्रदूषक रहा। पूसा में ओजोन प्रमुख प्रदूषक दर्ज किया गया।

घुम्मनहेड़ा में राहत
शहर के बाकी निगरानी केंद्रों की तुलना में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में नजफगढ़ के पास स्थित घुम्मनहेड़ा की स्थिति अलग रही। यहां एक्यूआई 97 के साथ हवा संतोषजनक श्रेणी में दर्ज हुई।

एक्यूआई में सुधार  जनभागीदारी का परिणाम : सिरसा
दिल्ली में 24 अक्तूबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 191 दर्ज किया गया। दिल्ली सरकार के अनुसार, कोविड काल को छोड़कर पिछले एक दशक में यह हवा की सबसे अच्छी स्थिति है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों और जनभागीदारी का परिणाम बताया।

प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर कार्रवाई के तहत 9,883 वाहनों के चालान किए गए। 2,810 किलोमीटर सड़कों की मैकेनिकल सफाई और 1,075 किलोमीटर सड़कों पर पानी का छिड़काव भी हुआ। 12,702 मीट्रिक टन कूड़ा और 2,223 मीट्रिक टन निर्माण मलबा हटाया गया। प्रदूषण नियंत्रण अभियान की निगरानी के लिए एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र, सीसीटीवी और एआई का उपयोग हो रहा है। मंत्री ने कहा कि एक्यूआई का 191 तक आना उत्साहजनक है, लेकिन सरकार प्रदूषण के खिलाफ अभियान जारी रखेगी। इसमें दिल्लीवासियों की भागीदारी आवश्यक है। 

अस्पतालों में बढ़े सांस के मरीज, सावधानी बरतने की सलाह
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के कारण पूर्वी दिल्ली के अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। खासकर अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो रही हैं। डॉक्टरों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है।

प्रदूषित हवा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक प्रभावित कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, हवा के बारीक प्रदूषित कण फेफड़ों तक पहुंचकर परेशानी बढ़ा सकते हैं। जीटीबी अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया। उनके अनुसार, अस्थमा के मरीजों में सांस फूलने और खांसी की शिकायत बढ़ सकती है। ऐसे मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए। उन्हें डॉक्टर की सलाह पर इनहेलर का इस्तेमाल करना चाहिए।


बाहर निकलने से बचने की सलाह : डॉक्टरों ने लोगों को बिना जरूरी काम के घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। यदि सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो, सीने में तेज जकड़न महसूस हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। निर्धारित इनहेलर से राहत न मिलने पर भी अस्पताल जाना जरूरी है। गंभीर स्थिति में अस्पताल जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। अस्थमा के मरीजों को अपनी मर्जी से दवा बंद करने या उसकी मात्रा बदलने से बचना चाहिए। 

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