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उपभोक्ता आयोग का आदेश: फ्लैट खरीदार को चार सप्ताह में 30 लाख रुपये वापस करे बिल्डर, नहीं तो बढ़ जाएगा ब्याज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:56 AM IST
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक बड़े फैसले में बिल्डर कंपनी को ग्राहक की पूरी रकम वापस करने का आदेश दिया है। यह मामला गाजियाबाद के एक फ्लैट की खरीद से जुड़ा है, जहां बिल्डर ने समय पर घर नहीं सौंपा। अदालत ने कहा कि बिना ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के घर देना गैरकानूनी है।
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अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चंद्रा की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कंपनी को आदेश दिया कि 29 लाख 69 हजार रुपये की पूरी रकम लौटाएं, साथ में जमा तारीख से 9 फीसदी सालाना ब्याज दें। मानसिक पीड़ा के लिए 2 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। मुकदमे का खर्च 50 हजार रुपये देने का आदेश दिया। पीठ ने कहा कि अगर चार हफ्तों में पैसे नहीं लौटाए गए, तो ब्याज 12 फीसदी हो जाएगा।
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दिल्ली के शिव विहार निवासी मुकेश तिवारी ने 2011 में प्रथम बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी में द एलियन कोर्ट प्रोजेक्ट का एक फ्लैट बुक किया था। कंपनी ने जून 2013 तक फ्लैट देने का वादा किया था, लेकिन 13 साल बाद भी पजेशन नहीं मिला।
तिवारी ने कुल 29 लाख 69 हजार रुपये का भुगतान किया था, जिसमें से कुछ रकम बैंक लोन से ली गई थी। तिवारी ने बताया कि कंपनी ने विज्ञापनों में अच्छी क्वालिटी और समय पर डिलीवरी का दावा किया था, लेकिन वादा पूरा नहीं किया। कंपनी ने हर महीने 12 हजार रुपये का किराया देने का भी वादा किया था जो सिर्फ 12-15 महीने ही दिया। अलॉटमेंट लेटर में फ्लैट नंबर बदल-बदल कर बताया गया, जो गलत था।
कंपनी ने अदालत में कहा कि निर्माण पूरा हो गया है और कंपलीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट अभी नहीं मिला। अदालत ने कहा कि बिना ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के घर रहने लायक नहीं माना जाता। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने बिल्डर की दलीलों को खारिज कर दिया।