World Book Fair 2026: रील से रचना तक... साहित्य की ओर लौटते युवा किताबों के बीच खुद को तलाशते दिखे
डिजिटल युग की तेज रफ्तार दुनिया से निकलकर युवा अब किताबों की ओर लौट रहे हैं, जो केवल पढ़ने की आदत का नहीं, बल्कि सोच में भी एक बड़े बदलाव का संकेत है। विश्व पुस्तक मेले में क्लासिक्स, प्रेम कथाओं और ऐतिहासिक रचनाओं की ओर युवाओं का आकर्षण साहित्य के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
विस्तार
सोशल मीडिया वाले जमाने में मोबाइल स्क्रीन की तेज रफ्तार दुनिया से निकलकर जब युवा किताबों के पन्नों में ठहरने लगे हैं, तो यह बदलाव सिर्फ पढ़ने की आदत का नहीं, सोच का भी है। विश्व पुस्तक मेले में इस बार भीड़ सिर्फ नई किताबों की नहीं, बल्कि क्लासिक्स, प्रेम कथाओं और पराक्रम से भरी रचनाओं की ओर खिंचती दिखी। उपन्यासों, कविताओं और ऐतिहासिक गाथाओं के बीच युवा न केवल साहित्य को, बल्कि खुद को भी नए सिरे से खोजते नजर आए।
साहित्य से इश्क ने पुस्तक मेले में पहुंचाया
हर स्टॉल युवा पाठकों से गुलजार है। एक युवा पाठक ने कहा, कि साहित्य से इश्क ने पुस्तक मेले में पहुंचा दिया है। कोई प्रेम उपन्यासों में खोया दिखा, तो कोई कविता संग्रह के पन्ने पलटता हुआ दिखा। एक युवा पाठक ने कहा, अगर किताबें न होतीं, तो शायद भावनाओं को समझना भी मुश्किल हो जाता। साहित्यकार इसे हिंदी और भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक जीत मान रहे हैं।
पुराने लेखकों की लेखनी का आज भी जादू
उपन्यास, कविता, नाटक और निबंध हर विधा के दिग्गज लेखकों की किताबें स्टॉल्स पर प्रमुखता से सजी दिखीं। मुंशी प्रेमचंद, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, महादेवी वर्मा, हरिवंशराय बच्चन, निराला, अज्ञेय, तुलसीदास, भारतेंदु हरिश्चंद्र, मोहन राकेश, मन्नू भंडारी, फणीश्वरनाथ रेणु और कमलेश्वर जैसे साहित्यकारों की कृतियां युवाओं के हाथों में बार-बार दिखीं।
चंदर-सुधा का प्रेम युवाओं के सवालों में
प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर किताबों की अलमारियों को निहारती एक युवती बार-बार पूछ रही थी, रेत की मछली नहीं मिल रही? युवक ने कोई दूसरी किताब लेने की सलाह दी, लेकिन युवती ने शांत स्वर में कहा रेत की मछली ही गुनाहों के देवता का जवाब है। लोकभारती प्रकाशन के स्टॉल संचालक बताते हैं कि युवा पाठक प्रेम को पुराने नजरिए से समझना चाहते हैं इसीलिए निर्मला, देवदास, मृणालिनी और गुनाहों का देवता जैसी क्लासिक प्रेम कथाएं खूब बिक रही हैं।
प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर युवा आत्मकथाएं, बायोपिक्स और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी किताबें खरीदते दिखे। प्रभात प्रकाशन के निदेशक पीयूष कुमार बताते हैं, कि इन पुस्तकों के जरिए पाठकों को न केवल ऐतिहासिक तथ्य मिलते हैं, बल्कि संघर्ष, आत्मबल और राष्ट्रप्रेम की भावना भी गहराती है। यही कारण है कि ऐसी किताबें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ आम युवा भी पढ़ना चाहते हैं।
कैप्टन शुभांशु ने सुनाई अंतरिक्ष की कहानी
विश्व पुस्तक मेला में मंगलवार को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय वायु सेना के पायलट से लेकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक के अपने सफर के बारे में बताया। उन्होंने यह बातें एनबीटी-इंडिया के निदेशक युवराज मलिक की ओर से बच्चों और युवाओं के लिए संचालित खास सत्र में साझा कीं। कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने बच्चों को भरोसा दिलाया कि कड़ी मेहनत और लगन से उनमें से कोई भी भविष्य का अंतरिक्ष यात्री बन सकता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 दिन अंतरिक्ष में रहने के लिए उन्हें करीब पांच साल तक कठिन प्रशिक्षण लेना पड़ा। उन्होंने हंसी-मजाक के अंदाज में यह भी बताया कि पृथ्वी पर लौटने के बाद उन्हें फिर से चलना सीखना पड़ा। कैप्टन शुक्ला ने भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को भी याद किया और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुस्तक ‘विंग्स ऑफ फायर’ पढ़ने का सुझाव दिया।
लेखकों ने साझा किए लेखन के अनुभव
भारत मंडपम के हॉल नंबर 2 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पंजाबी लेखक स्वर्णजीत सवी ने ‘लेखक मंच’ पर ‘आमने-सामने’ में बताया कि उन्होंने अपनी मां के निधन के बाद लिखना शुरू किया। कोंकणी लेखक प्रकाश एस. पर्येंकार ने कहा कि किसी विषय पर लिखने से पहले वे उस इलाके में जाकर रहते हैं और गहन अध्ययन करते हैं। उन्होंने अपनी रचना ‘काजरो’ का अंश भी पढ़ा। युवा साहिती: बहुभाषी कविता पाठ’ कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार और कवि ए. कृष्णराव ने की। कार्यक्रम में उर्दू के मोईद रशीदी, पंजाबी के गगन संधू और मैथिली की कवयित्री संस्कृति मिश्र ने अपनी कविताएं पढ़ीं गईं।