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भड़काऊ भाषण केस: जमानत लेने के लिए निचली अदालत में याचिका दायर करे शरजील, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 27 May 2022 10:42 AM IST
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सार
उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी नई याचिका में इमाम ने कहा है कि उनकी जमानत मुख्य रूप से निचली अदालत द्वारा खारिज कर दी थी क्योंकि यह पाया गया था कि यह देशद्रोह के आरोप तय करने के लिए उपयुक्त साक्ष्य है।
शरजील इमाम की पेशी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने गुरुवार को शरजील इमाम को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के लिए उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह मामले में जमानत के लिए निचली अदालत में याचिका दायर करने को कहा है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की खंडपीठ ने यह आदेश भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत तय किए गए आरोप के संबंध में सभी लंबित अपीलों और कार्यवाही को रोकने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश के मद्देनजर सुनाया। इमाम ने शीर्ष अदालत के आदेश के बाद उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी लंबित अपील में अंतरिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया था।
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हालांकि विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) अमित प्रसाद द्वारा आज एक आपत्ति उठाई कि 2014 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के संदर्भ में इस तरह की कोई भी जमानत याचिका पहले निचली अदालत में जाएगी। क्या आरोपी हाईकोर्ट जा सकते हैं।
एसपीपी के तर्क सुनने के बाद पीठ ने इमाम की ओर से पेश वकील तनवीर अहमद मीर को निचली अदालत में याचिका दायर करने की छूट प्रदान कर दी।
उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी नई याचिका में इमाम ने कहा है कि उनकी जमानत मुख्य रूप से निचली अदालत द्वारा खारिज कर दी थी क्योंकि यह पाया गया था कि यह देशद्रोह के आरोप तय करने के लिए उपयुक्त साक्ष्य है।
12 मई को दायर आवेदन में कहा गया है कि उनके खिलाफ मामला अब काफी कमजोर हो गया है और जमानत हासिल करने के लिए उनके मामले में सुधार हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अपीलकर्ता के खिलाफ कार्यवाही में विचार नहीं किया जा सकता है। उच्च न्यायालय अब 26 अगस्त को देशद्रोह के आरोप तय करने के खिलाफ इमाम की अपील पर विचार करेगा।