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सैनिक फार्म का क्या होगा?: हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दिया दो महीने का समय, कहा- अब फैसला लेने का वक्त आ गया

Tue, 18 Aug 2026 08:09 PM IST
Rahul Kumar Tiwari पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Tue, 18 Aug 2026 08:09 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दक्षिण दिल्ली की सैनिक फार्म कॉलोनी के नियमितीकरण पर अधिकारियों को दो महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सर्वेक्षण और योजना तैयार करने को कहा। अदालत ने कहा कि कॉलोनी का पूरा निर्माण अवैध है, लेकिन अब इसके भविष्य पर फैसला होना चाहिए।

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Delhi High Court grants officials two months time regarding Sainik Farms
सैनिक फार्म में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दक्षिण दिल्ली की सैनिक फार्म कॉलोनी के नियमितीकरण पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने अधिकारियों को इस मुद्दे पर दो महीने के भीतर फैसला लेने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने यह आदेश दिया। पीठ ने कहा कि कॉलोनी में किया गया पूरा निर्माण अवैध है।

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अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अधिकारी विकास शुल्क ले सकते हैं। वे कुछ निर्माण को बचा सकते हैं और कुछ को गिराने की योजना बना सकते हैं। पीठ ने अधिकारियों को सर्वेक्षण करने और योजना तैयार करने का निर्देश दिया। जितना बचाया जा सकता है, उसे बचाने की कोशिश करें। अदालत ने कहा कि उन्हें इस बात से सरोकार नहीं कि कैसा फैसला लिया जाएगा। लेकिन अब फैसला लेने का समय आ गया है ताकि निवासियों को अपना भविष्य पता हो।

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पीठ ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को निर्देश दिया। उन्हें 13 अगस्त 2025 के आदेश के अनुसार इस मुद्दे पर बैठक करनी होगी। बैठक का परिणाम मंत्रालय के सक्षम अधिकारी के शपथ पत्र के रूप में अदालत के समक्ष रखना होगा। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि सरकार इस मामले में समग्र दृष्टिकोण तभी अपना सकती है। यह तब होगा जब डीडीए द्वारा तैयार दिल्ली के मास्टर प्लान (एमपीडी) 2047 को केंद्र की मंजूरी मिल जाए। इसे विधिवत प्रकाशित भी किया जाए।
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एमपीडी-2047 और अवैध निर्माण
चेतन शर्मा ने बताया कि कॉलोनी के निवासियों को शुरुआत से ही इसके भविष्य की जानकारी थी। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि इसीलिए उन्हें मरम्मत की अनुमति नहीं दी जा रही है। पीठ ने दोहराया कि कॉलोनी का पूरा निर्माण अवैध है। कॉलोनी का कोई लेआउट प्लान नहीं है। कोई भवन योजना भी मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि केंद्र से एमपीडी-2047 को मंजूरी मिलने में कुछ समय लगने की संभावना है। यह प्रकाशित होने के बाद ही लागू होगा।

केंद्र का रुख और पूर्व के निर्देश
इसके बाद अदालत ने अधिकारियों को दो महीने के भीतर नियमितीकरण के मुद्दे पर बैठक करने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि 13 अगस्त 2025 के आदेश के तहत किए जाने वाले कार्य को संबंधित अधिकारी आज से दो महीने के भीतर पूरा करें। मामले को आगे की सुनवाई के लिए नवंबर में सूचीबद्ध किया गया है। अदालत सैनिक फार्म कॉलोनी के नियमितीकरण से संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी। 13 अगस्त 2025 को अदालत ने अधिकारियों से एक साथ बैठकर कॉलोनी के निवासियों के भविष्य पर फैसला लेने को कहा था। केंद्र के वकील ने इससे पहले कहा था कि सैनिक फार्म में यथास्थिति बनाए रखनी होगी। उन्होंने इसे एक 'समृद्ध कॉलोनी' बताया था।

समृद्ध कॉलोनियों का नियमितीकरण
केंद्र के वकील ने कहा था कि वहां न तो मरम्मत की अनुमति दी जा सकती है और न ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई। मामले में पहले दाखिल एक हलफनामे में केंद्र ने कहा था कि उसने सैनिक फार्म जैसी समृद्ध कॉलोनियों के नियमितीकरण में शामिल न होने का फैसला लिया है। सरकार फिलहाल 1,797 अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास कार्य पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इन कॉलोनियों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। केंद्र ने यह भी कहा था कि सैनिक फार्म जैसी समृद्ध कॉलोनियों में किए गए निर्माण को दिसंबर 2023 तक कानून के तहत संरक्षण प्राप्त था। अप्रैल 2022 में रमेश दुगर की ओर से याचिका पर सुनवाई हुई थी। हाईकोर्ट ने तब कहा था कि अब सैनिक फार्म के नियमितीकरण के मुद्दे का 'एक बार और हमेशा के लिए समाधान' किया जाए। अदालत ने कहा था कि अधिकारियों को फैसला लेना होगा, क्योंकि वे इस मुद्दे को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते।
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