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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में ट्रायल कोर्ट का आरोप तय करने का आदेश रद्द किया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में विशेष अदालत द्वारा आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने ऑडियो रिकॉर्डिंग मंगवाने के बावजूद उसे सुने बिना ही आरोप तय कर दिए, जो गलत है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने इस आदेश को एक सरकारी कर्मचारी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज रिश्वतखोरी के एक मामले से संबंधित है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप तय किए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि सीबीआई ने जिस बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट पर भरोसा किया है, वह असली ऑडियो रिकार्डिंग से अलग है। याचिकाकर्ता का कहना था कि ट्रायल कोर्ट ने पहले के आदेशों के बावजूद ऑडियो क्लिप सुने बिना ही आरोप तय कर दिए। अदालत ने नोट किया कि 8 जनवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश ने ऑडियो रिकार्डिंग सुनने के लिए सीडी मंगवाई थी, लेकिन बाद में उसे सुना नहीं गया। सीबीआई ने दलील दी कि ट्रांसक्रिप्ट की प्रामाणिकता का मुद्दा ट्रायल के दौरान तय किया जाएगा और आरोप तय करने के चरण में ऑडियो सुनना जरूरी नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट की पीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जब ट्रायल कोर्ट ने खुद ऑडियो रिकार्डिंग मंगवाई थी, तो आरोप तय करने से पहले उसे अवश्य सुन लेना चाहिए था।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में विशेष अदालत द्वारा आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने ऑडियो रिकॉर्डिंग मंगवाने के बावजूद उसे सुने बिना ही आरोप तय कर दिए, जो गलत है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने इस आदेश को एक सरकारी कर्मचारी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज रिश्वतखोरी के एक मामले से संबंधित है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप तय किए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि सीबीआई ने जिस बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट पर भरोसा किया है, वह असली ऑडियो रिकार्डिंग से अलग है। याचिकाकर्ता का कहना था कि ट्रायल कोर्ट ने पहले के आदेशों के बावजूद ऑडियो क्लिप सुने बिना ही आरोप तय कर दिए। अदालत ने नोट किया कि 8 जनवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश ने ऑडियो रिकार्डिंग सुनने के लिए सीडी मंगवाई थी, लेकिन बाद में उसे सुना नहीं गया। सीबीआई ने दलील दी कि ट्रांसक्रिप्ट की प्रामाणिकता का मुद्दा ट्रायल के दौरान तय किया जाएगा और आरोप तय करने के चरण में ऑडियो सुनना जरूरी नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट की पीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जब ट्रायल कोर्ट ने खुद ऑडियो रिकार्डिंग मंगवाई थी, तो आरोप तय करने से पहले उसे अवश्य सुन लेना चाहिए था।