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Cylinder Crisis: पश्चिम एशिया में जंग की आग दिल्ली की रसोइयों तक पहुंची, सिलेंडर की कमी से जूझने लगी राजधानी

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 12 Mar 2026 01:52 AM IST
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सार

पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति शृंखला बाधित होने से राजधानी के ज्यादातर इलाकों में वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर की किल्लत रही। इससे शहर के छोटे-छोटे ढाबे की भट्ठियां बंद रहीं और कुछ रेस्टोरेंट के शटर डाउन हुए।

Delhi is grappling with a shortage of cylinders
demo - फोटो : संवाद
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विस्तार

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग का असर दिल्ली में भी दिखने लगा है। पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति शृंखला बाधित होने से राजधानी के ज्यादातर इलाकों में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की किल्लत रही। इससे शहर के छोटे-छोटे ढाबे की भट्ठियां बंद रहीं और कुछ रेस्टोरेंट के शटर डाउन हुए। खाद्य पदार्थों के ऑनलाइन डिलिवरी प्लेटफार्म से भी ग्राहकों को बुकिंग नहीं ली जा रही है। घरेलू उपभोक्ताओं को भी समस्या का सामना करना पड़ा। बुकिंग नहीं होने के साथ सिलेंडर की सप्लाई की वेटिंग भी बढ़ गई है। ज्यादा दिक्कत शादी वाले घरों में हैं। लोग सिलिंडर के लिए गैस एजेंसियों के आगे लंबी कतारों में खड़े नजर आए।

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सिलेंडर की कमी और आपूर्ति में देरी का असर खाना पकाने के लिए बिजली से चलने वाले इंडक्शन स्टोव की बिक्री में उछाल के तौर पर दिखा। इन उपकरणों की मांग में 25-30 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। बीते 24 घंटों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज में लगभग 35 फीसदी की मांग बढ़ी है। क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट पर लोगों ने बड़ी संख्या में इंडक्शन स्टोव ऑर्डर किए हैं।
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ई-कॉमर्स शॉपिंग वेबसाइट के अनुसार, इंस्टामार्ट पर सामान्य दिनों की तुलना में इंडक्शन स्टोव की बिक्री करीब 10 गुना तक बढ़ गई है। वहीं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन पर पिछले 24 घंटों में मांग लगभग 20 गुना तक बढ़ने का दावा विक्रेताओं ने किया है। फ्लिपकार्ट ने भी पिछले कुछ दिनों में बिक्री में करीब तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की है। बिग बास्केट ने बढ़ती मांग देखते हुए अपने स्टॉक का अनुमान बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। मांग बढ़ने के कारण कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन स्टोव के अधिकांश मॉडल आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं और केवल कुछ महंगे विकल्प ही उपलब्ध हैं।

अब ‘निश’ प्रोडक्ट नहीं रहा इंडक्शन
एक कंपनी के मालिक रवि सक्सेना के अनुसार, अब इंडक्शन कुकटॉप सिर्फ छात्रों या हॉस्टल में इस्तेमाल होने वाला ऑप्शन नहीं रह गया है। पिछले कुछ साल में यह कई शहरी घरों में सेकेंडरी कुकिंग ऑप्शन बन गया है। अनुमान है कि देश के शहरी इलाकों में करीब 12-15 फीसदी घरों में पहले से इंडक्शन कुकटॉप मौजूद है। गैस सिलिंडर मिलने में देरी होती है या सप्लाई में दिक्कत आती है, तो लोग दूध उबालने, चाय बनाने या हल्की-फुल्की कुकिंग के लिए इंडक्शन का इस्तेमाल करते हैं। इंडक्शन कुकटॉप के साथ लिए खास तरह के बर्तनों की जरूरत होती है। इंडक्शन की मांग बढ़ने से इन बर्तनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

बैकअप के लिए इंडक्शन की खरीद
लोग बैकअप के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप खरीदना पसंद कर रहे हैं। बदरपुर निवासी पिंकी देवी ने बताया कि इंडक्शन बिजली से चलता है और इसमें गैस की जरूरत नहीं होती, इसलिए यह गैस के विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मंगलवार को ही इंडक्शन चूल्हे का ऑर्डर दिया है।

बढ़ती मांग का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला
बढ़ती मांग का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला है। किचन अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है। ऐसे में एक निजी कंपनी के शेयरों में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एक प्रतिष्ठित कुकर्स कंपनी और इलेक्ट्रिकल्स के शेयरों में भी तेजी देखी गई।

विशेषज्ञ की राय....
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 90 फीसदी से अधिक हिस्सा यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता है। ताजा घटनाक्रम खाना पकाने के ईंधन के लिए आयात पर निर्भरता के जोखिम को दिखाता है। सरकार को शहरी परिवारों को इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव पर खाना पकाने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करना चाहिए। इससे घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम होगा। नीति आयोग की रिपोर्ट का अनुमान है कि 2047 तक खाना पकाने के विभिन्न ईंधनों में एलपीजी की हिस्सेदारी 15 फीसदी होगी। अगले 10 वर्षों में इस बदलाव को तेजी से पूरा करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
-अभिषेक कर, फेलो, सीईईडब्ल्यू

दिल्ली में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और पीएनजी की कोई किल्लत नहीं, अफवाहों पर ध्यान न दें : सरकार

दिल्ली में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और पीएनजी की कोई कमी नहीं है। सरकार ने साफ कहा है कि राजधानी में सभी ईंधनों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य चल रही है। लोगों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें, अनावश्यक घबराहट या ज्यादा स्टॉक करने से बचें।

बुधवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। इसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, दिल्ली पुलिस, राजस्व विभाग, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) और तेल कंपनियों के बड़े अधिकारी शामिल हुए। बैठक में मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध जैसी स्थिति से एलपीजी और गैस की आपूर्ति बाधित होने की अफवाहों की पूरी जांच की गई। आईजीएल के अधिकारियों ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने 9 मार्च को आदेश जारी किया था। इसमें घरेलू पीएनजी और सीएनजी को प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली में घरेलू उपयोग के लिए पीएनजी की कोई कमी नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी करीब 80 फीसदी तक गैस आपूर्ति बहाल कर दी गई है।

तेल कंपनियों ने कहा कि दिल्ली में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की सप्लाई पहले की तरह ही है। उनके पास पर्याप्त स्टॉक है। एलपीजी सिलिंडर बुकिंग की समय सीमा 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है, लेकिन बुकिंग के बाद औसतन 2-3 दिनों में सिलिंडर घर पहुंच जाता है।

कमर्शियल गैस सिलिंडरों के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। अस्पतालों और स्कूलों को प्राथमिकता मिल रही है। तेल कंपनियां कमर्शियल सप्लाई सुचारू रखने की कोशिश में जुटी हैं। बैठक में गैस चोरी या कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश दिए गए। दिल्ली पुलिस और राजस्व विभाग को अलर्ट रहने को कहा गया है।

एलपीजी संकट पर केजरीवाल का केंद्र पर हमला बोला

आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने देश में गहराते एलपीजी गैस संकट को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है और स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो एक करोड़ से अधिक लोगों के बेरोजगार होने का खतरा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिए गए फैसलों के कारण यह संकट पैदा हुआ है।

पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता में केजरीवाल ने कहा कि भारत में एलपीजी की बड़ी मात्रा आयात के जरिये आती है। लिहाजा देश की कुल जरूरत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात होती है और इसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों से होती है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर प्रतिबंध के कारण गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे देश में एलपीजी की उपलब्धता में लगभग 50 से 55 प्रतिशत तक कमी आ गई है।

केजरीवाल ने कहा कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ रहा है। कई प्रतिष्ठानों के सामने संचालन बंद करने की नौबत आ गई है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई में करीब 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट पहले ही बंद हो चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। तमिलनाडु में लगभग दस हजार होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं, जबकि पंजाब और एनसीआर में भी हजारों प्रतिष्ठानों पर संकट मंडरा रहा है।

गुजरात के मोरबी क्षेत्र में टाइल उद्योग समेत सैकड़ों इकाइयां बंद हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि संकट के कारण बाजार में एलपीजी सिलिंडरों की जमकर कालाबाजारी भी हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इससे भारत के पारंपरिक संबंध प्रभावित हुए हैं और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर उसका असर पड़ रहा है।

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