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Delhi Riots 2020: खून के कतरों ने दी कत्ल की गवाही, अंकित शर्मा हत्याकांड में 2331 दिन बाद मिला न्याय
Wed, 15 Jul 2026 07:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 15 Jul 2026 07:07 AM IST
सार
अंकित शर्मा की हत्या के दौरान उनके शरीर से निकले खून के कतरों की गवाही अदालती आदेश में दर्ज हो गई है। अंकित के शव को जिस नाले से बरामद किया गया, जिस जगह पर हत्यारी भीड़ इकट्ठा हुई।
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दिल्ली दंगा 2020, file pic
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
दबा नहीं सकोगे मेरी आवाज जुल्म के साये में कत्ल के बाद भी मेरा लहू हर पन्ने पर गवाही लिख जाएगा...अंकित शर्मा की हत्या के दौरान उनके शरीर से निकले खून के कतरों की गवाही अदालती आदेश में दर्ज हो गई है। अंकित के शव को जिस नाले से बरामद किया गया, जिस जगह पर हत्यारी भीड़ इकट्ठा हुई।
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प्लास्टिक सीट पर पड़े उनके खून के छींटों का डीएनए मिलान ने उनके कत्ल की वीभत्सता बयान की। अदालत ने अपने आदेश में रोहिणी फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट और डीएनए रिपोर्ट को अहम सबूत के तौर पर स्वीकार किया है। दिल्ली दंगे से जुड़े इस मामले में पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को आधार बनाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया है। बेटे की हत्या के 2331 दिन बाद मिले न्याय से परिजन संतुष्ट हैं। एफएसएल टीम ने नाले की दीवार से खून के नमूने, प्लास्टिक शीट और कागज के टुकड़े बरामद किए, जिनका मिलान अंकित के खून से किया गया। मोबाइल फोन से बरामद वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग ने हसीन उर्फ मुल्लाजी की भूमिका उजागर की।
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उन्होंने फोन पर कबूला कि उन्होंने एक व्यक्ति को मारकर नाले में फेंका है। वॉइस सैंपल मैचिंग रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की। सीडीआर डेटा और सेल आईडी चार्ट से आरोपियों की लोकेशन चांद बाग पुलिया के पास साबित हुई। हथियार बरामदगी (चाकू) और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से घाव मैच किए गए। इन सबूतों ने पारंपरिक गवाहों की कमी को पूरा किया और अदालत को विश्वसनीय आधार प्रदान किया।
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पुलिस ने जोड़ी कड़ी से कड़ी
घटना की जांच के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, डाटा फिल्टरेशन, मोबाइल सीडीआर के जरिये कड़ियों से कड़ियां जोड़ीं। दरअसल, पुलिस के लिए सबसे अहम चुनौती गवाहों की कमी और भयग्रस्त माहौल थी। कई गवाह सार्वजनिक बयान देने से कतरा रहे थे। पुलिस ने अंकित को भीड़ द्वारा घसीट कर ले जाने, शव को तीन व्यक्तियों के नाले में फेंकने समेत कई सीसीटीवी कोर्ट के समक्ष रखे। इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत ने बचाव पक्ष की कई आपत्तियों जिसमें देरी से एफआईआर और गवाहों की विश्वसनीयता को चुनौती देना शामिल था खारिज कर दिया।
यह था मामला
25 फरवरी 2020 को दिल्ली के चांद बाग पुलिया क्षेत्र में सीएए समर्थक और विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान अंकित शर्मा, जो आईबी में तैनात थे, अपने घर से कुछ सामान लाने निकले थे। शाम तक जब वह घर नहीं लौटे तो उनके पिता रविंदर शर्मा ने 26 फरवरी को थाना दयालपुर में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में अंकित का शव चांद बाग नाले से बरामद हुआ है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर धारदार हथियारों से लगे 20 से अधिक घाव पाए गए। शव केवल अंडरवियर में था, जिससे स्पष्ट था कि हत्या के बाद शव को नाले में फेंका गया।
ताहिर की बिल्डिंग से शुरू हुई जांच नाले पर खत्म
पुलिस ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) टीम के साथ मिलकर ताहिर हुसैन की बिल्डिंग (ई-7, खजूरी खास) और आसपास के इलाके की जांच की। बिल्डिंग की छत और तीसरी मंजिल पर पत्थर, ईंटें, पेट्रोल बम, एसिड बम और अन्य हथियार बरामद हुए। सड़क पर पत्थर, बोतलें और जले हुए सामान मिले। पुलिस ने फोटोग्राफ्स, वीडियो फुटेज और सीडीआर डेटा के आधार पर आरोपी पहचान की। एक महत्वपूर्ण वीडियो फुटेज मिला, जिसमें तीन व्यक्ति शव को चांद बाग नाले में फेंकते दिख रहे थे। इस वीडियो को एफएसएल में एनालाइज किया गया।
हत्यारे ताहिर की सजा पर 23 को सुनवाई
दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को दोषी करार दिया है। दोषियों की सजा पर अदालत 23 जुलाई को सुनवाई करेगा। अदालत ने 320 पन्नों के फैसले में साफ किया कि दोषसिद्धि अभियोजन की ओर से पेश किए गए 91 गवाहों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वैज्ञानिक एवं इलेक्ट्रानिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट, वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल रिकार्ड तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला के आधार पर की गई।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए घटनाक्रम की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिससे अंकित शर्मा की हत्या की पूरी कड़ी स्थापित हो गई। इसी आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। अदालत ने ताहिर हुसैन के साथ नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या, अपहरण और अन्य मामलों में दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी हसीन उर्फ सलमान, फिरोज, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी, समीर खान और मुंतजीम को इस मामले में बरी कर दिया है।