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Delhi NCR News: यमुना के बाढ़ क्षेत्र में बोरवेल चलाने की मांगी अनुमति
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दिल्ली जल बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण से किया अनुरोध
100 बोरवेल से रोजाना 30 से 40 मिलियन गैलन अतिरिक्त पानी की होगी सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली । दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से यमुना के बाढ़ क्षेत्र (ओ-जोन) में लगे 100 से अधिक बोरवेल चालू करने की अनुमति मांगी है। इसका उद्देश्य गर्मियों में पानी की कमी को कम करना है। अभी दिल्ली में पानी की मांग लगभग 1,260 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) तक पहुंचती है, जबकि उपलब्ध सप्लाई करीब 1,000 एमजीडी ही है। इस अंतर से हर साल गर्मियों में जल संकट गहरा जाता है।
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, यह प्रस्ताव पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए एनजीटी को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि मंजूरी मिलने के बाद इन बोरवेल से रोजाना 30 से 40 मिलियन गैलन अतिरिक्त पानी की सप्लाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी राज्यों से अतिरिक्त पानी की व्यवस्था करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
41 फीसदी भूजल अति-शोषित श्रेणी में
हालांकि, प्रस्ताव को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का लगभग 41 फीसदी भूजल क्षेत्र पहले ही अति-शोषित श्रेणी में आ चुका है। ऐसे में भूजल पर ज्यादा निर्भरता भविष्य में और बड़े संकट को जन्म दे सकती है। पर्यावरणविद् दीवान सिंह का कहना है कि लगातार भूजल दोहन से एक्विफर दूषित हो सकते हैं।
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100 बोरवेल से रोजाना 30 से 40 मिलियन गैलन अतिरिक्त पानी की होगी सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली । दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से यमुना के बाढ़ क्षेत्र (ओ-जोन) में लगे 100 से अधिक बोरवेल चालू करने की अनुमति मांगी है। इसका उद्देश्य गर्मियों में पानी की कमी को कम करना है। अभी दिल्ली में पानी की मांग लगभग 1,260 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) तक पहुंचती है, जबकि उपलब्ध सप्लाई करीब 1,000 एमजीडी ही है। इस अंतर से हर साल गर्मियों में जल संकट गहरा जाता है।
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, यह प्रस्ताव पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए एनजीटी को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि मंजूरी मिलने के बाद इन बोरवेल से रोजाना 30 से 40 मिलियन गैलन अतिरिक्त पानी की सप्लाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी राज्यों से अतिरिक्त पानी की व्यवस्था करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
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41 फीसदी भूजल अति-शोषित श्रेणी में
हालांकि, प्रस्ताव को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का लगभग 41 फीसदी भूजल क्षेत्र पहले ही अति-शोषित श्रेणी में आ चुका है। ऐसे में भूजल पर ज्यादा निर्भरता भविष्य में और बड़े संकट को जन्म दे सकती है। पर्यावरणविद् दीवान सिंह का कहना है कि लगातार भूजल दोहन से एक्विफर दूषित हो सकते हैं।