{"_id":"699343bb5458b3a2a00c100f","slug":"delhis-reservoirs-will-be-revived-with-funds-recovered-from-illegal-groundwater-exploitation-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-124326-2026-02-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: अवैध भूजल दोहन से वसूली गई राशि से दिल्ली के जलाशय होंगे पुनर्जीवित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: अवैध भूजल दोहन से वसूली गई राशि से दिल्ली के जलाशय होंगे पुनर्जीवित
विज्ञापन
विज्ञापन
मामला ब्रह्मपुरी के चौहान बांगर इलाके में बिना अनुमति के लगाए गए बोरवेल से भूजल के अवैध दोहन से जुड़ा था
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। एनजीटी ने कहा कि अवैध भूजल दोहन के मामले में वसूली गई पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग दिल्ली में जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए होगा। मामला ब्रह्मपुरी के चौहान बांगर इलाके में बिना अनुमति के लगाए गए बोरवेल से भूजल के अवैध दोहन से जुड़ा था। अधिकरण ने निर्देश दिया कि डीपीसीसी जिला नमभूमि समिति और दिल्ली नमर्द्रभूमि प्राधिकरण से सलाह लेकर एक कार्ययोजना तैयार करे। वसूली गई राशि का उपयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली के जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए हो। साथ ही, छह महीने के भीतर योजना को लागू किया जाए। इसके अलावा, इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाए। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि अवैध भूजल दोहन पर सख्ती से रोक लगाना और वसूली गई राशि को पर्यावरण सुधार में लगाना बेहद जरूरी है। इन निर्देशों के साथ मामले का निस्तारण किया गया। जांच में पता चला कि करीब 7-8 वर्ष पहले बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बोरवेल स्थापित हुआ था। एनजीटी के पहले के आदेश के बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और उप-मंडल दंडाधिकारी (सीलमपुर) ने संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद 9 सितंबर 2024 को बोरवेल को सील कर दिया गया। इस मामले में 35,064 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय की गई थी, जो नोटिस और वसूली की प्रक्रिया के बाद 10 नवंबर 2025 को जमा कर दी गई।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। एनजीटी ने कहा कि अवैध भूजल दोहन के मामले में वसूली गई पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग दिल्ली में जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए होगा। मामला ब्रह्मपुरी के चौहान बांगर इलाके में बिना अनुमति के लगाए गए बोरवेल से भूजल के अवैध दोहन से जुड़ा था। अधिकरण ने निर्देश दिया कि डीपीसीसी जिला नमभूमि समिति और दिल्ली नमर्द्रभूमि प्राधिकरण से सलाह लेकर एक कार्ययोजना तैयार करे। वसूली गई राशि का उपयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली के जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए हो। साथ ही, छह महीने के भीतर योजना को लागू किया जाए। इसके अलावा, इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाए। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि अवैध भूजल दोहन पर सख्ती से रोक लगाना और वसूली गई राशि को पर्यावरण सुधार में लगाना बेहद जरूरी है। इन निर्देशों के साथ मामले का निस्तारण किया गया। जांच में पता चला कि करीब 7-8 वर्ष पहले बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बोरवेल स्थापित हुआ था। एनजीटी के पहले के आदेश के बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और उप-मंडल दंडाधिकारी (सीलमपुर) ने संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद 9 सितंबर 2024 को बोरवेल को सील कर दिया गया। इस मामले में 35,064 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय की गई थी, जो नोटिस और वसूली की प्रक्रिया के बाद 10 नवंबर 2025 को जमा कर दी गई।