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भलस्वा स्थित जर्जर ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स का होगा पुनर्निर्माण : सूद
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भलस्वा में करीब 7,400 ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स समय पर आवंटन न होने के कारण हुए जर्जर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को भलस्वा स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैट्स का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि झुग्गी-झोपड़ी एवं मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री आशीष सूद ने बताया कि भलस्वा में करीब 7,400 ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स बनाए थे, लेकिन समय पर आवंटन न होने के कारण ये अब जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। इनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद उनकी मरम्मत, पुनर्निर्माण और पुनर्विकास की रूपरेखा तैयार होगी। करदाताओं के धन से निर्मित इन फ्लैट्स का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और पात्र लाभार्थियों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत आवंटन पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी झुग्गी निवासी को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के विस्थापित नहीं किया जाएगा। इन-सीटू डेवलपमेंट, रीडेवलपमेंट और पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाया कि फ्लैट्स का समय पर आवंटन न होने से वे रहने योग्य नहीं बचे और अब इनके पुनर्निर्माण पर अतिरिक्त व्यय करना पड़ेगा।
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को भलस्वा स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैट्स का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि झुग्गी-झोपड़ी एवं मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री आशीष सूद ने बताया कि भलस्वा में करीब 7,400 ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स बनाए थे, लेकिन समय पर आवंटन न होने के कारण ये अब जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। इनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद उनकी मरम्मत, पुनर्निर्माण और पुनर्विकास की रूपरेखा तैयार होगी। करदाताओं के धन से निर्मित इन फ्लैट्स का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और पात्र लाभार्थियों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत आवंटन पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी झुग्गी निवासी को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के विस्थापित नहीं किया जाएगा। इन-सीटू डेवलपमेंट, रीडेवलपमेंट और पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाया कि फ्लैट्स का समय पर आवंटन न होने से वे रहने योग्य नहीं बचे और अब इनके पुनर्निर्माण पर अतिरिक्त व्यय करना पड़ेगा।
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