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Delhi NCR News: जामिया में छात्र संघ बहाली की मांग तेज, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र
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अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और मुख्य प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर शनिवार हुए हंगामे के बाद फिर से छात्रों ने आंदोलन के लिए गुलिस्तान गालिब लॉन के गेट नंबर सात के पास डेरा डाल लिया है। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। छात्रों ने सुरक्षाकर्मियों को गेट के अंदर से गुलाब के फूल देने का प्रयास किया। वहीं भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने रविवार को छात्र संघ को तत्काल बहाल करने, आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयां वापस लेने और मुख्य प्रॉक्टर का इस्तीफे की मांग की।
भूख हड़ताल पर मोहम्मद जासिम अली, एबिन, रिहान हैदर और रिहान पंवार बैठे हुए है। इसमें जामिया प्रशासन कुछ छात्रों को निष्कासित और कैंपस से बैन कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। रविवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि कैंपस में छात्र संघ 2006 से निष्क्रिय है। इसके कारण छात्रों को अपने मुद्दे उठाने और सामूहिक रूप से अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) को शिकायत देने की मौजूदा व्यवस्था से भी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। 17 अक्तूबर को आंदोलन कर रहे छात्रों को जबरन परिसर से बाहर निकाला गया। जामिया प्रशासन को छात्रों की मांगों पर संवाद करना चाहिन न कि उनके खिलाफ कार्रवाई। इस घटना के लिए मुख्य प्रॉक्टर जिम्मेदार है उनका इस्तीफा होना चाहिए।
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बता दें कि शनिवार सुबह जामिया में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को हटा दिया गया था। जिसके बाद कैंपस में दिनभर हंगामा चलता रहा था। छात्रों ने कैंपस में प्रवेश के लिए गेट नंबर सात के नीचे का हिस्सा तोड़ दिया था। सुरक्षा कारणों से बड़ी तादाद में कैंपस सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। वहीं सोशल मीडिया पर जामिया कैंपस की एक दीवार पर कैंपस बैन से आजादी, आरएसएस से आजादी, रिक्लेम जामिया स्टूडेंट यूनियन और फ्री फिलिस्तीन के नारे वाली तस्वीर वायरल है।
जामिया कुलपति को सांसद ने लिखा पत्र : वहीं छात्रों की मांगों के समर्थन में सहरानपुर के सांसद इमरान मसूद का एक पत्र सामने आया है। जिसमें उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन और छात्रों के निष्कासन के संबंध में अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग को लेकर जामिया कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ को पत्र लिखा है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुंचे जामिया :
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने जामिया कैंपस में पहुंचकर छात्र संघ चुनाव की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव छात्रों का अधिकारी है। छात्र संघ कैंपस में लोकतंत्र को मजबूत करता है। छात्रों को अपनी समस्याएं उठाने का मंच देता हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर शनिवार हुए हंगामे के बाद फिर से छात्रों ने आंदोलन के लिए गुलिस्तान गालिब लॉन के गेट नंबर सात के पास डेरा डाल लिया है। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। छात्रों ने सुरक्षाकर्मियों को गेट के अंदर से गुलाब के फूल देने का प्रयास किया। वहीं भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने रविवार को छात्र संघ को तत्काल बहाल करने, आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयां वापस लेने और मुख्य प्रॉक्टर का इस्तीफे की मांग की।
भूख हड़ताल पर मोहम्मद जासिम अली, एबिन, रिहान हैदर और रिहान पंवार बैठे हुए है। इसमें जामिया प्रशासन कुछ छात्रों को निष्कासित और कैंपस से बैन कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। रविवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि कैंपस में छात्र संघ 2006 से निष्क्रिय है। इसके कारण छात्रों को अपने मुद्दे उठाने और सामूहिक रूप से अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।
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छात्रों ने आरोप लगाया कि डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) को शिकायत देने की मौजूदा व्यवस्था से भी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। 17 अक्तूबर को आंदोलन कर रहे छात्रों को जबरन परिसर से बाहर निकाला गया। जामिया प्रशासन को छात्रों की मांगों पर संवाद करना चाहिन न कि उनके खिलाफ कार्रवाई। इस घटना के लिए मुख्य प्रॉक्टर जिम्मेदार है उनका इस्तीफा होना चाहिए।
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बता दें कि शनिवार सुबह जामिया में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को हटा दिया गया था। जिसके बाद कैंपस में दिनभर हंगामा चलता रहा था। छात्रों ने कैंपस में प्रवेश के लिए गेट नंबर सात के नीचे का हिस्सा तोड़ दिया था। सुरक्षा कारणों से बड़ी तादाद में कैंपस सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। वहीं सोशल मीडिया पर जामिया कैंपस की एक दीवार पर कैंपस बैन से आजादी, आरएसएस से आजादी, रिक्लेम जामिया स्टूडेंट यूनियन और फ्री फिलिस्तीन के नारे वाली तस्वीर वायरल है।
जामिया कुलपति को सांसद ने लिखा पत्र : वहीं छात्रों की मांगों के समर्थन में सहरानपुर के सांसद इमरान मसूद का एक पत्र सामने आया है। जिसमें उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन और छात्रों के निष्कासन के संबंध में अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग को लेकर जामिया कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ को पत्र लिखा है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुंचे जामिया :
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने जामिया कैंपस में पहुंचकर छात्र संघ चुनाव की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव छात्रों का अधिकारी है। छात्र संघ कैंपस में लोकतंत्र को मजबूत करता है। छात्रों को अपनी समस्याएं उठाने का मंच देता हैं।