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Delhi NCR News: महामना मालवीय मिशन में विलय को लेकर मतभेद, नियमों की अनदेखी का आरोप
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नई दिल्ली। महामना मालवीय मिशन की दिल्ली-एनसीआर इकाई की आमसभा शुक्रवार को मालवीय स्मृति भवन में हुई। बैठक में दिल्ली-एनसीआर और इंद्रप्रस्थ शाखाओं के प्रस्तावित विलय को लेकर तीखे मतभेद सामने आए।
महासचिव अर्चना गुप्ता ने आरोप लगाया कि विलय की प्रक्रिया संगठन के नियमों को दरकिनार कर आगे बढ़ाई जा रही है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से सात मार्च को पत्र और 11 मार्च को नोटिफिकेशन जारी कर विलय की घोषणा कर दी गई, जबकि दिल्ली-एनसीआर इकाई को इसकी पूर्व सूचना तक नहीं दी गई। गुप्ता ने कहा कि विलय तभी वैध माना जा सकता है, जब दोनों शाखाओं के सदस्यों की सहमति के साथ संगठन के नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए।
उन्होंने पूर्व अध्यक्ष रोहित सिन्हा पर विलय के लिए दबाव बनाने और समानांतर अंतरिम कमेटी गठित करने की कोशिश का भी आरोप लगाया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड खाते भी पेश नहीं हो सके, जिस पर अगली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
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वहीं, अनीमेष सक्सेना ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि विलय अभी हुआ नहीं है, बल्कि प्रक्रिया जारी है और दोनों शाखाओं की सदस्यता का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने 28 जुलाई के महासचिव के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा पदाधिकारी सितंबर तक कार्यकाल पूरा करेंगे, इसके बाद दोनों शाखाओं के चुनाव कराए जाएंगे। सक्सेना ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव के अलावा किसी अन्य का आदेश मान्य नहीं होगा। संवाद
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महासचिव अर्चना गुप्ता ने आरोप लगाया कि विलय की प्रक्रिया संगठन के नियमों को दरकिनार कर आगे बढ़ाई जा रही है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से सात मार्च को पत्र और 11 मार्च को नोटिफिकेशन जारी कर विलय की घोषणा कर दी गई, जबकि दिल्ली-एनसीआर इकाई को इसकी पूर्व सूचना तक नहीं दी गई। गुप्ता ने कहा कि विलय तभी वैध माना जा सकता है, जब दोनों शाखाओं के सदस्यों की सहमति के साथ संगठन के नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए।
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उन्होंने पूर्व अध्यक्ष रोहित सिन्हा पर विलय के लिए दबाव बनाने और समानांतर अंतरिम कमेटी गठित करने की कोशिश का भी आरोप लगाया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड खाते भी पेश नहीं हो सके, जिस पर अगली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
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वहीं, अनीमेष सक्सेना ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि विलय अभी हुआ नहीं है, बल्कि प्रक्रिया जारी है और दोनों शाखाओं की सदस्यता का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने 28 जुलाई के महासचिव के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा पदाधिकारी सितंबर तक कार्यकाल पूरा करेंगे, इसके बाद दोनों शाखाओं के चुनाव कराए जाएंगे। सक्सेना ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव के अलावा किसी अन्य का आदेश मान्य नहीं होगा। संवाद