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बोरवेल सील करने का अधिकार डीएम-एसडीएम के पास : डीजेबी
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एनजीटी में डीजेबी का जवाब-निरीक्षण में अवैध भूजल दोहन की पुष्टि, कार्रवाई के लिए डीएम को भेजा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। शाहदरा के कबूल नगर में बिना अनुमति चल रहे वाटर बॉटलिंग प्लांट और अवैध तरीके से भूजल निकालने वाले बोरवेल को सील करने का अधिकार जिलाधिकारी (डीएम) और एसडीएम के पास है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने जवाब दाखिल कर कहा है कि अवैध बोरवेल को सील करने और उसका बिजली कनेक्शन काटने का अधिकार जल बोर्ड के पास नहीं है।
याचिकाकर्ता अनिल कुमार ने एनजीटी में शिकायत दी थी कि कबूल नगर के गुरुद्वारा वाला रोड स्थित क्वार्टर नंबर 3/23 में बिना अनुमति बोरवेल लगाकर भूजल निकाला जा रहा है। आरोप है कि इसी पानी का इस्तेमाल वाटर बॉटलिंग प्लांट में किया जा रहा है। शिकायत में कई बार सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया था।
एनजीटी के निर्देश पर डीजेबी ने जांच की। मुख्य अभियंता दलबीर सिंह की ओर से दाखिल जवाब में बताया गया कि 23 जनवरी को एसडीएम शाहदरा को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। छह जुलाई को दोबारा निरीक्षण किया गया, जिसमें अवैध तरीके से भूजल दोहन की पुष्टि हुई। निरीक्षण की तस्वीरों के साथ उत्तर-पूर्वी जिले के डीएम को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया। कार्रवाई की जानकारी नहीं मिलने पर 10 अगस्त को डीएम को रिमाइंडर भी भेजा गया।
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बोरवेल की जांच करना जल बोर्ड का काम
डीजेबी ने एनजीटी को बताया कि उसके अधिकार क्षेत्र में अवैध बोरवेल की जांच, मौके का निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। वहीं, दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के 18 मई 2010 के आदेश के अनुसार अवैध बोरवेल को सील करने और उससे जुड़ी बिजली आपूर्ति काटने की कार्रवाई संबंधित क्षेत्र के डीएम और एसडीएम कर सकते हैं। डीजेबी ने कहा कि एनजीटी के किसी भी आदेश या निर्देश का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। शाहदरा के कबूल नगर में बिना अनुमति चल रहे वाटर बॉटलिंग प्लांट और अवैध तरीके से भूजल निकालने वाले बोरवेल को सील करने का अधिकार जिलाधिकारी (डीएम) और एसडीएम के पास है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने जवाब दाखिल कर कहा है कि अवैध बोरवेल को सील करने और उसका बिजली कनेक्शन काटने का अधिकार जल बोर्ड के पास नहीं है।
याचिकाकर्ता अनिल कुमार ने एनजीटी में शिकायत दी थी कि कबूल नगर के गुरुद्वारा वाला रोड स्थित क्वार्टर नंबर 3/23 में बिना अनुमति बोरवेल लगाकर भूजल निकाला जा रहा है। आरोप है कि इसी पानी का इस्तेमाल वाटर बॉटलिंग प्लांट में किया जा रहा है। शिकायत में कई बार सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया था।
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एनजीटी के निर्देश पर डीजेबी ने जांच की। मुख्य अभियंता दलबीर सिंह की ओर से दाखिल जवाब में बताया गया कि 23 जनवरी को एसडीएम शाहदरा को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था। छह जुलाई को दोबारा निरीक्षण किया गया, जिसमें अवैध तरीके से भूजल दोहन की पुष्टि हुई। निरीक्षण की तस्वीरों के साथ उत्तर-पूर्वी जिले के डीएम को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया। कार्रवाई की जानकारी नहीं मिलने पर 10 अगस्त को डीएम को रिमाइंडर भी भेजा गया।
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बोरवेल की जांच करना जल बोर्ड का काम
डीजेबी ने एनजीटी को बताया कि उसके अधिकार क्षेत्र में अवैध बोरवेल की जांच, मौके का निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। वहीं, दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के 18 मई 2010 के आदेश के अनुसार अवैध बोरवेल को सील करने और उससे जुड़ी बिजली आपूर्ति काटने की कार्रवाई संबंधित क्षेत्र के डीएम और एसडीएम कर सकते हैं। डीजेबी ने कहा कि एनजीटी के किसी भी आदेश या निर्देश का पूरी तरह पालन किया जाएगा।